अखबारों में चेहरा छपवाने के चक्कर में कई लोग नहीं लगा रहे मास्क
दूसरों को नसीहत देने वाले खुद नहीं कर रहे गाइडलाइन का पालन
–कपिल कुमार गोयल

नजीबाबाद। देश भर में व्याप्त वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण काल में भी लोग खुद की समाज में पहचान बनाए रखने की जुगत में लगे दिखायी दे रहे हैं। दूसरो को कोरोना से सचेत रहते हुए सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की नसीहत देने वाले क्षेत्र व समाज में लोकप्रियता पाने के लिए उक्त लोग फोटो छपवाने की होड़ में चेहरे पर मास्क लगाने से गुरेज करते हैं।देश में व्याप्त वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर सरकारें अपनी ओर से विभिन्न प्रयास कर रही हैं। सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए विभिन्न गाइडलाइन पेश करते हुए लोगों से इस पर अमल करने की पुरजोर अपील भी की गई है। प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी भी लोगों से सरकार की ओर से कोरोना को लेकर जारी की गयी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। साथ ही पुलिस भी लोगों से महामारी के इस दौर में मुंह पर मास्क लगाने, घरों से बेवजह बाहर न निकलने, एक-दूसरे से दो गज की सामाजिक दूरी बनाए रखने आदि के सरकार के कोरोना को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन कराने के लिए विभिन्न स्थानों पर लोगों के चालान भी काट रही है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि देश में कोरोना के दस्तक देने के समय से ही काफी संख्या मेें सामाजिक संस्थाएं, राजनैतिक दलों से जुड़े लोग और सामाजिक कार्यकर्ता लोगों की मदद के लिए आगे आकर हाथ बढ़ाते दिखे। हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले कोरोन काल में लोगों की मदद के लिए अखबारों की सुर्खियों में जुटे बड़ी संख्या में लोग अब मानो थक-हारकर अपने घरों पर बैठ गए हैं। इससे यह भी संदेश मिला कि कुछ लोग शायद त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पूर्व चर्चा में बने रहकर लोकप्रियता प्राप्त कर चुनावों में इस लोकप्रियता को भुनाने के चक्कर में ही योजनाबद्ध तरीके से जुटे हुए थे। ऐसे लोग कोरोना महामारी की दूसरी लहर में चर्चा से बाहर हो चले हैं। उधर इन दिनों कोरोना महामारी के तेजी से बढ़ते संक्रमण के दौर में भी कुछ सामाजिक संस्थाओं और राजनैतिक दलों के पदाधिकारी एवं सदस्य लोगों को सामग्री वितरित करने में जुटे हुए हैं। साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों से सरकार की ओर से जारी मास्क है जरूरी, रखें दो गज की दूरी आदि गाइडलाइन का पालन करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। यह कोई बुरी बात नहीं है कि कोरोना महामारी की इस भयावह दूसरी लहर मेें उन्होंने लोगों की मदद को हाथ बढ़ाया है। हालांकि ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि वह जितनी मशक्कत कर लोगों को मास्क, काढ़ा, सैनिटाइजर आदि बांट रहे हैं और लोगों से सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की अपील कर रहे हैं, उसके साथ ही उन्हें स्वयं भी सरकार की गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करना चाहिए। अखबारों की सुर्खियों में रहकर फोटो छपवाने की होड़ में जुटे इस प्रकार के लोग मास्क व काढ़ा आदि का वितरण करने के दौरान बिना मास्क लगाए फोटो खिंचवाते समय शायद यह भूल जाते हैं कि जब वह स्वयं ही सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं, ऐसे में क्या उनकी अपील का लोगों पर कोई असर होगा? इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय नेतागण एवं जनप्रतिनिधि अपने प्रयासों से होने वाले विकास कार्यों को दर्शाने के लिए भी फोटो खिंचवाने के दौरान मास्क को चेहरे पर लगाने से गुरेज करते दिखायी दे रहे हैं।

ऐसे लोगों को समझने की जरूरत है कि कहीं लोकप्रियता बटोरने के चक्कर में वे स्वयं ही इस कोरोना महामारी के संक्रमण के फेर में न आ जाएं। उन्हें भी अच्छी तरह समझने की आवश्यकता है कि कोविड-19 वायरस का स्ट्रेन यह देखकर किसी को संक्रमित नहीं करता है कि उसके सामने आम व्यक्ति है अथवा समाज की सेवा में जुटा विशेष व्यक्ति। साथ ही ये भी समझना होगा कि ये कोरोना वायरस है जनाब, जो यह नहीं समझता कि सिर्फ अखबारों में छपवाने को फोटो खिचवाने के लिए ही आपने लोगों के बीच में मास्क उतारा है! मेरी ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों व सदस्यों तथा जन सेवा के कार्य में जुटे लोगों से पुरजोर अपील है कि वे दूसरों को सरकार की गाइड लाइन का पालन करने की सलाह देने के साथ ही स्वयं भी कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क को अच्छी तरह से पहनें, जिससे उनका मुंह व नाक दोनों ढकें रहें और उन पर कोरोना महामारी के वायरस का असर न हो सके। यह भी समझना होगा कि सरकार की गाइडलाइन का अच्छी तरह से पालन कर ही हम स्वस्थ और सुरक्षित रह सकते हैं। सभी को चाहिए कि वह यह समझें कि यह विश्व व्यापी कोरोना महामारी है और इससे सतर्क रहकर ही सुरक्षित रहा जा सकता है। अंत में कहना चाहूंगा कि मूल मंत्र जान है तो जहान है को ही समझें।
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