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दोहरी मार झेल रहे जल निगम कर्मचारी

लखनऊ। कोरोना संकट के बीच जल निगम के कर्मचारियों को वेतन और पेंशन से भी महरूम होना पड़ रहा है। प्रदेश के 21 हजार कर्मचारियों का पिछले चार माह का वेतन-पेंशन बकाया है। इसे लेकर जल निगम के कर्मचारी संगठन लगातार निगम को सरकारी विभाग बनाए जाने की मांग कर रहे थे, वह भी पूरी नहीं हो पाई। यूपी जल निगम कर्मचारी महासंघ के नेता अजय पाल सिंह सोमवंशी बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में तमाम कर्मचारियों के परिवारों में भी संक्रमण पहुंचा तो इलाज पर भी काफी पैसा खर्च हुआ। ऐसे में कई कर्मचारियों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। निगम में करीब दस हजार नियमित और करीब 11 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जिनके वेतन पेंशन पर हर महीने करीब 70 करोड़ का खर्च आता है।

काम कम मिलने से बिगड़े हालात : जल निगम में वेतन पेंशन को लेकर संकट कई साल से चल रहा है, जिसकी बड़ी वजह जल निगम की आमदनी में कमी है। जल निगम की आमदनी का सबसे बड़ा जरिया सरकारी पेयजल और सीवर योजनाओं का काम करने के बदले मिलने वाला पैसा है, लेकिन जेएनएनयूआरएम के बाद विशेषज्ञ संस्था होने के बाद भी सरकार ऐसे विभागों को काम देने लगी जो विशेषज्ञ नहीं हैं।

सरकारी विभाग बने तो दूर हो संकट यूपी जल निगम कर्मचारी संघ के नेता अजय पाल सिंह का कहना है कि सरकार बकाया सेंटेज भी नहीं दे रही है। ऐसे में लगातार सरकारी विभाग बनाने की मांग की जा रही है, ताकि वेतन-पेंशन का संकट समाप्त जल निगम में वेतन ट्रेजरी से जारी हो। लगातार मांग के बाद भी अभी तक सरकार उसे पूरा नहीं कर पाई है। सरकारी विभाग बन जाए तो सेंटेंज मांगने की जरूरत ही सरकार से नही पड़ेगी। सरकार से मांग है कि वह कोरोन के इस संकट के समय कर्मचारियों को बकाया वेतन-पेंशन दे।

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