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कानपुर नगर पुलिस उपायुक्त पश्चिम संजीव त्यागी सूझबूझ और दूरदृष्टि वाले क्षमतावान आईपीएस अधिकारी हैं। उनसे विभिन्न मुद्दों पर समय चक्र टाइम्स से वार्ता के कुछ अंश…

IPS संजीव त्यागी

समय चक्र- जब से कानपुर नगर में कमिश्नर प्रणाली लागू हुई है, आपका अनुभव किस प्रकार रहा है और यातायात तथा क्राइम के क्षेत्र में आपके जोन में पुलिस किस प्रकार से कार्य कर रही है?

पुलिस उपायुक्त-जब से कानपुर नगर की पुलिस व्यवस्था को बदल कर कमिश्नरेट सिस्टम लागू हुआ है, तब से मेरी पोस्टिंग भी एक डीसीपी के रूप में यहां हुई है। मुझे डीसीपी पश्चिम का कार्यभार कमिश्नर असीम अरुण द्वारा दिया गया है। कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली क्या होगी, इस संबन्ध में तय हुआ कि 2 मूल मंत्र गाइडिंग प्रिंसिपल की तरह कार्य करेंगे। पहला यह कि जन सहयोग जिसमें पुलिसिंग की प्राथमिकताएं हैं कि जनसंवाद कर लोगों के
माध्यम से ही विचारों को लेकर तय की
जाएंगी। दूसरा विशेषज्ञता पूर्ण पुलिस व्यवहार
जिसमें प्रत्येक क्षेत्र में पुलिस अपने
कार्याचरण सुधारने हेतु उच्च स्तर की
विशेषज्ञता को हासिल कर प्रदत्त की जाने
वाली सेवा की गुणवत्ता में सुधार और
बदलाव कर दिखाए। मकसद यह है कि कानपुर नगर शहर के रहने वाले लोगों को बदले हुए सिस्टम की
वजह से किसी प्रकार की परेशानी न हो और
उनके रोजमर्रा के जीवन में और अधिक
सुधार होना चाहिए। …जिसके लिए हर स्तर
पर हर कार्य क्षेत्र में ध्यान पूर्वक कार्य योजना
बनाकर कार्य किए जाने की जरूरत महसूस
हुई है और हम इस पर कार्य भी कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी
पुलिसिंग के लिए ज्यादा से ज्यादा बढ़ाया
जाए जिससे कि पुलिस की परफॉर्मेंस कई
गुना बढ़ जाए।

अब रोजाना मीटिंग- कुछ बदलाव जो कानपुर नगर
कमिश्नरेट में किए गए हैं वह निम्न प्रकार
है। पहला सभी गजटेड ऑफिसर और थाना
प्रभारियों की रोजाना रात्रि में जूम एप्लीकेशन
के माध्यम से ऑनलाइन मीटिंग होती है,
जिसमें दिन भर के विषयों पर चर्चा की जाती
है और अगले दिन की कार्ययोजना तय की
जाती है। इसका काफी सकारात्मक प्रभाव रहा
है और पुलिसिंग की गुणवत्ता में भी काफी
सुधार हो रहा है और ट्रैफिक के क्षेत्र में
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर ई-चालान
व्यवस्था लागू की गई। इसके अलावा एक
प्रवर्तन केंद्र बनाया गया है, जहां कई सारे
कर्मियों को बैठा कर ऑटोमेटिक चालान
काटने की व्यवस्था की गई है। कुछ चौराहों
पर स्मार्ट चौराहे की व्यवस्था लागू की गई है।
जहां पर कैमरे लगाए गए हैं और बिना किसी
पुलिसकर्मी की मौजूदगी के स्वतः चालान
काटे जा रहे हैं तथा कैमरों के माध्यम से और
प्रवर्तन केंद्र के माध्यम से वह चालान उनके घर तक पहुंच रहे हैं।

खोदकर निकाले अपराधी-
इसकी वजह से ट्रैफिक व्यवस्था को
सुधारने में काफी सहयोग हुआ है और
क्रमशः इसी व्यवस्था को अलग-अलग
चौराहों पर फैलाया जा रहा है। जनपद की
क्राइम ब्रांच ने कई अच्छे कार्य किए हैं
ऑगेनाइज्ड क्राइम और ऐसे अपराधी जो
किसी तरह से बचकर छुपे रहते हैं उनको
खोदकर निकाला गया है ऐसे भी कई प्रकरण
संज्ञान में आए हैं जिन पर कार्रवाई हुई है जैसे
कि महिला की विदेश में तस्करी करने वाले
गिरोह का पदाफांश किया गया है और
महिलाएं मुक्त कराई गई हैं इत्यादि।

जन सहयोग अनिवार्य- अपराध नियंत्रण एक सतत प्रक्रिया है। आज के
बदलते हुए परिवेश में यह संभव नहीं है कि
अकेले पुलिस अपने दम पर, अपनी ताकत के दम
पर अपराध पर पूर्णतया अंकुश लगा सके। इसके
लिए जन सहयोग अनिवार्य है। अपराध नियंत्रण के लिए एक सिस्टमैटिक अप्रोच अपनाई जा रही है, जिसमें कार्य योजना के तहत सब कुछ किया जा रहा है। सभी थाना इन्चार्ज व एसीपी व एडिशनल डीसीपी इत्यादि के कार्य निर्धारित किए गए हैं। सभी को अपने निर्धारित कार्य के अनुरूप कार्य करना है। …और मेरा मानना है कि जनता की समस्याओं की संवेदनशीलता के साथ सुनवाई और उनके सार्थक निस्तारण के मंत्र
को साध कर पुलिस लोगों की आस्था अपने प्रति
प्रबल ढंग से संजो सकती है। -संजीव त्यागी कानपुर नगर पुलिस उपायुक्त पश्चिम

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