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बिजनौर। विधायक ओम कुमार हैट्रिक लगाकर नहटौर (सुरक्षित) सीट पर कमल खिलाने में कामयाब हो पाएंगे या नहीं, यह सवाल क्षेत्र के मतदाताओं के जेहन में कौंध रहा है! इस सीट पर भाजपा के ओमकुमार के अलावा, सपा-रालोद गठबंधन के मुंशीराम पाल, बसपा से प्रिया सिंह व कांग्रेस से मीनाक्षी सिंह चुनावी समर में हैं।

2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई विधानसभा नहटौर सीट पर प्रथम वार 2012 में चुनाव हुआ तो ओम कुमार ने यहां से बसपा प्रत्याशी के रूप में रूप में ताल ठोकी। उस समय प्रदेश में सत्तारूढ़ बसपा विरोधी लहर थी। बावजूद इसके ओम कुमार अपनी भाषण शैली से लोगों को क्षेत्र के विकास का सपना दिखाकर दलित-मुस्लिम समीकरण साधने में कामयाब रहे और सपा के राजकुमार राजू को 19398 मतों से परास्त कर नहटौर सीट से पहला विधायक होने का गौरव प्राप्त किया। लेकिन विरोधी पार्टी का विधायक होने के कारण क्षेत्र में विकास कराने में बहुत पीछे रह गये। इस कारण जनता के बीच उनके प्रति आक्रोश उत्पन्न हो गया। इसी बीच स्थित को भांप विधायक ओम कुमार ने 2017 में भाजपा का दामन थाम लिया और मुजफ्फरनगर दंगे के बाद उत्पन्न हुई ध्रुवीकरण की लहर पर सवार होकर कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी मुन्नालाल प्रेमी को 22951 मतों से मात देकर एक बार पुनः विधायक की कुर्सी पर कब्जा कर लिया।

इस बार सत्ताधारी विधायक होने के नाते क्षेत्र की जनता को उनसे बहुत अपेक्षा थी लेकिन जैसा कि अधिकतर लोग कहते हैं कि वे क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाये। क्षेत्र की अधिकतर सडकें व लिंक रोड आज भी गड्ढों में तब्दील हैं। रोडवेज बस स्टैंड की स्थिति बदहाल है। नहटौर-किरतपुर रोड पर बसों का संचालन बंद हो गया है। ऐसे और भी कई मुद्दे हैं जिनसे लोग विधायक से असंतुष्ट हैं। वहीं किसान आंदोलन के चलते किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग प्रदेश की भाजपा सरकार के विरुद्ध है। इस बार न दलित-मुस्लिम गठजोड़ है और न ही ध्रुवीकरण। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कहीं पार्टी का विरोध तो कहीं उनका निजी विरोध होने के बाद भी विधायक ओम कुमार हैट्रिक लगाकर नहटौर सीट पर कमल खिलाने में कामयाब हो पायेगें?

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में नहटौर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पास कोई कद्दावर नेता नहीं था। पार्टी किसी मजबूत प्रत्याशी की तलाश में थी। तमाम प्रयासों के बाद जब ओमकुमार को भाजपा में शामिल कराया गया। उस समय पार्टी के नेता सुभाष वाल्मीकि, रचनापाल, सरदार कूडे़ सिंह, दुष्यंत सिंह, पूर्व विधायक ओमप्रकाश, प्रीतम सिंह नहटौर विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट लेने वालों की लाइन में थे, लेकिन बसपा के विधायक ओमकुमार के शामिल होने से भाजपा की चुनाव लड़ाने की समस्या दूर हो गई क्योंकि ओमकुमार के रूप में भाजपा को मजबूत नेता मिल गया था।

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