शेरकोट में साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की रची गई थी साजिश। दो मुस्लिम भाइयों द्वारा तीन मजारों में तोड़फोड़ व आगजनी का मामला। पुलिस प्रशासन की सूझबूझ से टली एक बड़ी अनहोनी।

बिजनौर। पुलिस व प्रशासन की सूझबूझ के चलते जनपद का साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने से बच गया। डीएम एसपी ने शेरकोट में तीन मजारों में तोड़फोड़ व आगजनी के मामले की गंभीरता को देखते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई कर बड़ी अनहोनी को टाल दिया। दूसरी तरफ आरोपियों की बहन ने अपने भाइयों को डिप्रेशन का शिकार बताते हुए सवाल खड़े किये हैं।
गौरतलब है कि रविवार को शेरकोट में सैकड़ों साल पुरानी तीन पीर बाबाओं की मज़ार को निशाना बनाते हुए दो सगे मुस्लिम भाइयों ने जमकर तोड़फोड़ कर तहस नहस कर डाला था। माहौल में ज़हर घोलने के मकसद से हिन्दू धर्म की पोशाक पहनकर वारदात को अंजाम दिया। इतना ही नहीं मज़ार पर चढ़ाई जाने वाली चादरों को आग के हवाले कर दिया। डीएम उमेश मिश्रा व एसपी दिनेश सिंह की सूझबूझ के चलते शहर में माहौल खराब न हो इसी मकसद से आनन फानन में दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अफसर उनसे गहनता से पूछताछ कर रहे हैं। पकड़े गए दोनों भाई बिजनौर के शेरकोट इलाके के ही रहने वाले हैं।
लिबास को लेकर प्रश्नचिन्ह?
बिजनौर के शेरकोट इलाके में रविवार शाम दो सगे भाइयों आदिल व कमाल ने हिन्दू धर्म का लिबास पहनकर सैकड़ों साल पुरानी दरगाह भूरे शाह बाबा, जलालशाह बाबा व तीसरी क़ुतुब शाह की मज़ार को टार्गेट बनाया। एक के बाद एक तीनों मज़ारों को तहस नहस करते चले गए और इतना ही नहीं दोनों शातिर भइयों ने मज़ार पर चढ़ी सभी चादरों को आग के हवाले कर दिया। फिलहाल शुरुआती तौर पर यही अंदाज़ लगाया जा रहा हैं कि माहौल को बिगाड़ने की नीयत से दोनों सगे भाइयों ने भगवा रंग का चोला पहनकर वारदात को अंजाम दिया। हालांकि चलते फिरते कुछ राहगीरों ने मज़ार पर तोड़फोड़ करते हुए देख लिया था। आनन फानन में डीएम एसपी ने मौका-ए-वारदात पर पहुंच कर स्थिति को कंट्रोल में करते हुए तुरन्त टूटी तीनों मज़ारों पर मरम्मत का काम शुरू करा दिया।
पहुंच गया पुलिस का अमला- साथ ही पुलिस अधीक्षक पूर्वी ओमकार सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी अफजलगढ़ शुभ सुचित, पुलिस क्षेत्राधिकारी धामपुर इन्दू सिद्धार्थ, कोतवाल अफजलगढ़ मनोज कुमार, एसओ रेहड़ सुदेश पाल, स्वाट टीम प्रभारी मनोज परमार, पंकज तोमर आदि शेरकोट थाने पहुंचे। एसपी दिनेश सिंह ने बताया कि पुलिस ने दोनों आरोपी सगे भइयों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है।

बहन का दावा डिप्रेशन में है भाई- गिरफ्तार आरोपियों की बहन अलीशा उस्मान का कहना है कि उनके तीन भाइयों में से एक की मौत होने के बाद एक भाई डिप्रेशन में चले गए। उनका मुरादाबाद, दिल्ली वगैरह जगह इलाज कराया। वो ठीक हुए तो कुवैत भेज दिया। …लेकिन उनकी दिमागी हालत देखकर वापस भेज दिया गया। डिप्रेशन में होने की वजह से ही उन्होंने मजार तोड़ा।

अलीशा ने सवालिया लहजे में पूछा कि कोई सही दिमाग का मुस्लिम होकर भी मजार कैसे तोड़ सकता है? सबसे छोटा भाई वहां बाद में पहुंचा। उनकी हालत की वजह से पिता भी डिप्रेशन में चले गए हैं। सिर पर भगवा पगड़ी पहने होने की बात पर अलीशा ने कहा कि भाई डिप्रेशन में होने के कारण ही सिर पर ओढ़कर चले गए। वो भगवा रुमाल लाए थे, इस पर जब उन्हें घरवालों ने समझाया तो बोले कि तुम्हारी गलत सोच है। हिन्दू, मुस्लिम एक ही हैं। उन्होंने पॉलीथिन जला दी, यह नहीं पता कि उसमें छोटे भाई का पासपोर्ट भी था या नहीं। अलीशा ने बताया कि सबसे छोटे भाई का एडमिशन प्रियंका स्कूल में कराया लेकिन डिप्रेशन की वजह से ही बाहर निकाला गया। आरोप लगाया कि पुलिस आई और बिना परमिशन घर के अंदर तक घुस आई। सामान बिखेर दिया। घर पर मां और भाभी थीं। भाइयों को पीटते हुए ले गए, मां बेहोश हो गईं।


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