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पोषण पाठशाला में अभिभावकों को किया गया जागरूक। वीडियो कान्फ्रेसिंग एवं वेब लिंक के माध्यम से किया गया ’’पोषण पाठशाला’’ का आयोजन।

बिजनौर। पोषण अभियान के अन्तर्गत सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार की अध्यक्षता में वीडियो कान्फ्रेसिंग एवं वेब लिंक के माध्यम से ’’पोषण पाठशाला’’ का आयोजन किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेन्द्र मिश्र के अनुसार पोषण अभियान के अन्तर्गत जन-सामान्य को पोषण के विषय में  जागरूक करने के लिये शासन एवं निदेशालय द्वारा प्रत्येक माह पोषण पाठशाला का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में गुरुवार को पोषण का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय उच्चाधिकारियो के साथ-साथ विषय विशेषज्ञों द्वारा भी प्रतिभाग किया गया। पोषण पाठशाला का थीम ’’सही समय पर ऊपरी आहार की शुरूआत’’ थी। सही कार्यक्रम में उपस्थित विषय विशेषज्ञों द्वारा बच्चों के 06 माह का हो जाने पर सही समय पर ऊपरी आहार की शुरूआत किये जाने के सम्बन्ध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी। इस कार्यक्रम में जनपद की समस्त आंगनबाडी कार्यकत्रियों के द्वारा भी वेब लिंक के माध्यम से प्रतिभाग किया गया तथा आंगनबाडी केन्द्रों पर लाभार्थी भी उपस्थित रहे। आंगनबाडी कार्यकत्रियों के द्वारा शासन से प्राप्त स्मार्ट फोन के माध्यम से आंगनबाडी केन्द्र पर उपस्थित लाभार्थियों एवं जन-सामान्य को कार्यक्रम का सजीव प्रसारण दिखाया गया ताकि लाभार्थी एवं जनसामान्य विषय विशेषज्ञों के द्वारा ऊपरी आहार की शुरूआत किये जाने सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम में उपस्थित विषय विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गयी कि 06 माह पूर्ण होने के उपरान्त बच्चे को ऊपरी आहार दिये जाने की शुरूआत किया जाना नितान्त आवश्यक है, क्योंकि 06 माह की आयु पूर्ण हो जाने के उपरान्त बच्चे को मां के दूध से पूरा पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे बच्चे का मानसिक एवं शारीरिक विकास प्रभावित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को 06 माह के उपरान्त विभिन्न पोषण विविधताओं से भरपूर अद्र्व ठोस आहार देना चाहिए। एक ही प्रकार का ऊपरी आहार बार-बार दिया जाना उचित नहीं है, इसलिये आहार में विविधता लानी चाहिए ताकि बच्चे के शरीर को प्रत्येक प्रकार के पोषण तत्व मिलते रहें तथा बच्चा मानसिक एवं शारीरिक रूप से विकसित हो सके।
विषय विशेषज्ञों के अनुसार ऊपरी आहार के साथ-साथ मां का दूध भी 02 वर्ष तक जारी रखना चाहिए, क्योकि मां के दूध में बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिये जरूरी लगभग सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। बच्चे के बीमार होने पर भी मां द्वारा स्तनपान कराना तथा ऊपरी आहार दिया जाना जारी रखना चाहिए, इससे बच्चे को कुपोषण से लड़ने में सहायता मिलती है।

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