पशुओं में फैली नई बीमारी एलएसडी। लंपी स्किन डिजीज वायरस के कारण होता है गो-जातीय पशुओं में चमड़ी का रोग। पशुपालन विभाग से मांगी साढ़े तीन लाख वैक्सीन। प्रदेश के हिस्से में आ रही साढ़े 17 लाख वैक्सीन। बकरियों में पिछले कुछ वर्षों में फैली गोट पॉक्स की वैक्सीन ही रामबाण साबित होगी!
बिजनौर। जनपद में पशुओं पर नई संक्रामक बीमारी लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप शुरू हो गया है। अब तक सामने आए 354 मामलों में से चार पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 45 ठीक भी हुए हैं। पशुपालन विभाग को ढाई लाख वैक्सीन की डिमांड भेजी गई है। वहीं पूरे प्रदेश के हिस्से में मात्र साढ़े 17 लाख वैक्सीन आने की संभावना है। फिलहाल इस बीमारी से बचाव व उपचार की कोई वैक्सीन ही नहीं है, बल्कि बकरियों में पिछले कुछ वर्षों में फैली गोट पॉक्स की वैक्सीन ही रामबाण साबित होगी!

एक दूसरे से दूर रखें पशु- जनपद बिजनौर में पशुओं पर नई संक्रामक बीमारी लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप शुरू हो गया है। इस बीमारी के लक्षण दिखने के बाद एहतियात के तौर पर पशुओं को एक दूसरे से दूर रखना जरूरी है। क्षेत्र के किसानों को अपने पशुओं की देखभाल में सावधानी बरतनी चाहिए।
घबराएं नहीं, सावधानी बरतें पशुपालक- लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गो-जातीय पशुओं में चमड़ी का रोग है जो लंपी स्किन डिजीज वायरस के कारण होता है। जानकारों का कहना है कि पशु पालकों को लंपी बीमारी से घबराने की नहीं, बल्कि सावधानी बरतने की जरूरत है। शासन-प्रशासन व पशुपालन विभाग की ओर से बीमारी की रोकथाम के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा है कि पशुपालक रोग प्रभावित क्षेत्र से पशु ना खरीदें। यह गौवंश और भैंसों को प्रभावित करने वाली एक संक्रामक, छूत और आर्थिक महत्व की बीमारी है। यह चमड़ी और शरीर के अन्य भागों में गांठ बनने के उपरान्त फटने से बने घावों के कारण कभी-कभी घातक भी हो सकती है।

क्या करें प्राथमिक उपचार? आमतौर पर पशुओं को बुखार आना, भूख न लगना और मुंह, नाक, थन, जननांग, मलाशय की त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली पर गांठे बनना, दूध उत्पादन में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी मृत्यु इस रोग की नैदानिक अभिव्यक्तियां हैं। द्वितीयक जीवाणु संक्रमण होने से प्रभावित पशुओं की स्थिति और खराब हो जाती है। पीड़ित पशु के शरीर पर गांठे बनने के कारण इस रोग को गांठदार या ढेलेदार चमड़ी रोग भी कहा जाता है।
एलएसडी प्रभावित किसी भी पशु में लम्पी स्किन डिजीज होने पर अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से उसका इलाज कराएं। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग कर घावों के उपचार एवं मक्खियों को दूर करने के लिए कीट विकर्षक/एंटीसेप्टिक दवा लगाएं।

सीवीओ विजेंद्र सिंह ने बताया कि जनपद में 354 केस सामने आए हैं, चार पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 45 ठीक हुए हैं। जांच के लिए भेजे गए सैम्पल में से 03 पॉजिटिव हैं, जबकि 12 निगेटिव हैं। पशुपालन विभाग को ढाई लाख वैक्सीन की डिमांड भेजी गई है। इस वैक्सीन को एलएसडी प्रभावित क्षेत्रों के आसपास वाले क्षेत्र के पशुओं को लगाया जाएगा। अभी इस बीमारी की कोई वैक्सीन नहीं बनी है। बकरियों की बीमारी में कारगर वैक्सीन इस रोग के उपचार में प्रभावी है।
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