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नांगल जट में हुआ संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में सत्संग। सत्संग के बाद हुआ विशाल लंगर का आयोजन।

बिजनौर। संत निरंकारी मंडल ब्रांच बिजनौर के तत्वाधान में ग्राम नांगल जट में एक विशाल सत्संग का आयोजन महात्मा धर्मपाल सिंह के निवास स्थान पर किया गया। इस अवसर पर जसपुर से पधारे महात्मा पूर्व क्षेत्रीय संचालक श्री गुरु दयाल जी ने कहा कि हमें सदैव सेवा सत्संग व सुमिरन करते रहना चाहिए, तभी हमारा बेड़ा पार होगा। अगर हमारे जीवन में इन तीनों में से किसी भी एक चीज की कमी है तो हमारी भक्ति अधूरी है। इन तीनों के संगम से ही हमारी भक्ति पूरी होती है।

सब सुखों की खान है सत्संग- महात्मा श्री गुरु दयाल जी ने कहा कि सत्संग में आने से हमें सदैव सुख ही सुख मिलते हैं, क्योंकि सत्संग सब सुखों की खान है। सत्संग के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। हमें जो यह मानव जन्म मिला है, यह बहुत ही भाग्य से मिला है क्योंकि इस मानव योनि नहीं हम भवसागर से पार हो सकते हैं और बिना गुरु के मुक्ति नहीं है गुरु ही हमें मुक्ति का रास्ता बताते हैं और भवसागर से हमारा बेड़ा पार कर देते हैं। गुरु की कृपा से ही हमारा यह लोक सुखी होता है। इसीलिए हमें हमेशा सेवा सत्संग सुमिरन करते रहना चाहिए। आज सतगुरु माता जी सुदीक्षा जी महाराज समय की पैगंबर हैं और निरंकारी मिशन की सतगुरु हैं, वही हमारा बेड़ा पार कर रही हैं। उनसे जो हमें ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ है वह बहुत ही अच्छा है। ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होने पर हमारे कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं।जो हमें ब्रह्म ज्ञान मिल जाता है तो हम बहुत सुखी हो जाते हैं। सद्गुरु की कृपा से ब्रह्म ज्ञान के द्वारा जब हम रमई राम को पा लेते हैं, तो कुछ भी बाकी नहीं रहता। हमें सदैव प्यार से रहना चाहिए क्योंकि प्यार सजाता है गुलशन को और नफरत वीरान करे।

पूर्व संचालक महात्मा कृपाल सिंह त्यागी के संचालन में हुए सत्संग में संयोजक महात्मा बाबूराम निरंकारी, कुशल पाल मुखी, राजवीर सिंह बगीची, आसाराम, राम अवतार, फकीरचंद, हुकुम सिंह पूर्व ग्राम प्रधान नंगल जट, चंद्रपाल, रमेश, चंद्रपाल सिकंदरी, अक्षय सागर, मीडिया प्रभारी भूपेंद्र कुमार निरंकारी पत्रकार, लोकेश, सुशीला, मंजू, वंदना त्यागी, प्रियांशी, संध्या, खुशी, अंजलि, गीता, सर्वेश, जोगराज, वंश आदि ने अपने अपने विचार व आध्यात्मिक गीत प्रस्तुत किए। सत्संग में अनुयायियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सत्संग के बाद एक विशाल लंगर का आयोजन किया गया। सत्संग कार्यक्रम में सेवा दल के सदस्यों व अन्य महापुरुषों का विशेष योगदान रहा।

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