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नौ वर्ष पूर्व ऐसा था विद्यालय का नजारा

प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहा जटनंगला का सरकारी प्राथमिक विद्यालय। शिक्षक ने बदल दी विद्यालय की तस्वीर। राज्य स्तरीय पत्रिका के प्रथम पृष्ठ पर विद्यालय के छाया चित्र को मिली जगह।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित पत्रिका में दिखाया गया है विद्यालय के शौचालय के छायाचित्र

आकाश तोमर, स्योहारा।

सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों को मात देने लगे हैं। संसाधन, ग्रीनरी, विद्यालयीय सौंदर्य, स्वच्छता, अनुशासन, स्तरीय पढ़ाई व सामान्य ज्ञान सरकारी प्राइमरी स्कूल की पहचान बनने लगा है। स्कूल में अब कक्षा में प्रोजेक्टर से पढ़ाई कराई जाती है। स्योहारा ब्लाक क्षेत्र में जटनंगला का प्राथमिक विद्यालय इसका उदाहरण बना है, जहां बच्चों की संख्या भी साल दर साल बढ़ी है।

यूं तो अनुशासनहीनता, अस्वच्छता, स्तरहीन शिक्षा के लिए सरकारी प्राइमरी स्कूल पहचाने जाते हैं, लेकिन यदि शिक्षक के मन में लगन हो तो सरकारी स्कूलों में भी बदलाव दिखाई देने लगाता है। ऐसा ही बदलाव हुआ है जटनंगला के प्राइमरी स्कूल में। यहां शिक्षा आधुनिक ज्ञान के साथ कदमताल कर रही है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए कोर्स के साथ साथ शिक्षक द्वारा अंग्रेजी स्पीकिंग का कोर्स भी कराया जा रहा है।

विद्यालय में प्रवेश द्वार से ही बहुत करीने से कटी घास की बाउंड्रीवाल, सौंदर्य को बढ़ाने के लिए शानदार पेड़ पौधे स्वागत करते हैं। बच्चे पूर्ण रूप से ड्रेस कोड में आते हैं। स्कूल में दीवारों, क्लास रूम में मनोरंजक ज्ञानवर्द्धक पेंटिंग लगी हैं। बच्चों में अपनी कक्षा के अनुरूप अंग्रेजी बोलने समझने का ज्ञान है। किसी भी बच्चे से अंग्रेजी में सामान्य संवाद किया जा सकता है। राष्ट्रपिता, राज्यपाल का नाम, पिता का नाम, फलों, फूलों, जानवरों, पक्षियों आदि के नाम पूछे जा सकते हैं। बच्चों को 30 तक पहाड़े याद हैं।

प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक वैभव चौधरी का कहना है कि 2014 में यह विद्यालय भी अन्य विद्यालयों जैसा ही था। गांव में ओबीसी व सामान्य जाति के बच्चे तो इस विद्यालय में प्रवेश ही नहीं लेते थे, जिसे मैंने चुनौती के रूप में लिया। चार वर्ष पूर्व अपने खर्च से एक प्रोजेक्टर खरीदकर बच्चों को कथा – कहानियों के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया। विद्यालय में सौंदर्यीकरण हेतु हेज लगाई, उसकी कटिंग कराई और पौधे लगाए। शौचालय नहीं था। इसलिए अपने पास से 30 हजार रुपए खर्च करके शौचालय बनवाया। बाद में ग्राम प्रधान द्वारा शौचालय की धनराशि दे दी गई, साथ ही इंटरलॉकिंग करा दी।

  • आठ वर्ष पूर्व पढ़ने के लिए विद्यालय में आते थे सिर्फ 9 ही बच्चे
  • जटनंगला के प्राइमरी स्कूल में वर्ष 2014 में सिर्फ 9 बच्चे पढ़ाई करने आते थे। जैसे जैसे स्कूल की हालत में सुधार हुआ, तो बच्चों की संख्या भी बढ़ गई। वैभव चौधरी ने बताया कि गांव के पांचवी कक्षा तक के सभी बच्चे हमारे यहां प्राइमरी स्कूल में ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि शिक्षा अनुशासन, सामान्य ज्ञान आदि में उच्च स्तरीय मुकाम हासिल कर इस स्थिति में लाया जाए कि अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला किसी कान्वेंट स्कूल में ना कराकर गांव के प्राथमिक विद्यालयों में ही कराएं।

वैभव चौधरी ने बताया कि नीति आयोग द्वारा पंजीकृत संस्था “प्राग्रथ” द्वारा विद्यालय को झूले और एक कंप्यूटर सेट बच्चों को इसी माह दिया जाएगा। वहीं यूनिसेफ के सौजन्य से प्रकाशित राज्य स्तरीय पत्रिका के प्रथम पृष्ठ पर भी विद्यालय के छाया चित्र को जगह मिली है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित पत्रिका में विद्यालय के शौचालय के छायाचित्र को दिखाया गया है।

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