
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव बीजेपी अपने सिंबल पर लड़ेगी. नगर निगम में मेयर, पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष पार्षद, वार्ड अध्यक्ष समेत सभी चुनाव बीजेपी अपने ही चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी.
महत्वपूर्ण चर्चा- उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव को लेकर लखनऊ में एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. संभवतः नगर निकाय के उम्मीदवारों के चयन के पैमानों को लेकर भी चर्चा हुई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के अलावा 7 मोर्चों के शीर्ष नेता भी बैठक में पहुंचे। एमएलसी चुनाव पर भी चर्चा हुई.
मिली थी विधानसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी
विधानसभा चुनाव में ग्रामीण इलाकों में संपर्क बढ़ाने के साथ बीजेपी ने शहरी इलाकों में पकड़ कायम रखी थी. अब वह नगर निगमों, नगर पालिकाओं के चुनाव में भी यही प्रदर्शन कायम रखना चाहेगी. पंचायत चुनावों में bjp ने 85 प्रतिशत से ज्यादा सीटें जीतकर बड़ी कामयाबी पाई थी.
माननीयों की संतानों को टिकट नहीं
नगर निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी ने पहले ही स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी के विधायकों और सांसदों के बेटे-बेटियों और अन्य पारिवारिक सदस्यों को टिकट नहीं दिया जाएगा. उनके परिवार का कोई सदस्य निर्दलीय चुनाव लड़ता है तो उन पर ऐक्शन होगा. संगठन को मजबूत बनाने के लिए एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत लागू कराने की तैयारी है, हालांकि बताते हैं कि ये बदलाव नगर निकाय चुनाव के बाद किया जाएगा.
जल्दी ही सांगठनिक बदलाव
जल्दी ही संगठन में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है। अभी परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी हैं. नरेंद्र कश्यप पिछड़ा वर्ग प्रदेश अध्यक्ष के साथ मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. बेबी रानी मौर्य राष्ट्रीय महामंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी देख रही हैं. एके शर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ऊर्जा मंत्री हैं. जेपीएस राठौर प्रदेश महामंत्री के साथ स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री हैं.
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