
झालू हृदयानंद क्रीड़ा स्थल को आमजन ने की सुचारू कराने की मांग
लाखों रुपए की लागत से तैयार क्रीड़ा स्थल बना शो पीस
बिजनौर। झालू नगर के प्राईवेट बस स्टैंड के निकट स्थित पंडित हृदयानंद क्रीड़ा मैदान बदहाल स्थिति में है। मिनी स्पोर्ट स्टेडियम का निर्माण खेलकूद व्यायाम आदि के लिए हुआ था। बताया जाता है कि सरकारी मशीनरी की सुस्त नीति से मिनी स्टेडियम का निर्माण आठ वर्ष बाद भी सरकारी फाइलों में उलझा हुआ होने से पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान में कीड़ा स्थल पर ताला लटका हुआ है। बुजुर्ग, युवा, महिलाए, छोटे-छोटे बच्चे क्रीड़ा स्थल में व्यायाम, खेलकूद के अभ्यास से वंचित है।
सरकारी फाइलों में फंसा मामला:
कस्बा झालू में बस स्टैंड के समीप स्थित पंडित हृदयानंद क्रीड़ा स्थल का निर्माण सरकारी फाइलों में फंसने से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण समय सीमा के अंतर्गत होने के लिए हुआ था। इसके बावजूद समय सीमा समाप्त होने के उपरांत भी मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम का आज तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया। लाखों रुपए की लागत से बना मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम शो पीस बनकर रह गया है। मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले बुजुर्गों महिलाओं व बच्चों को स्टेडियम के गेट पर ताला लगा देखकर निराश होकर लौटना पड़ता है। मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलकूद के लिए लगाई गई सामग्री भी धूल चाट रही है। वहीं मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल के मैदान के साथ-साथ व्यायाम व छोटे बच्चों के लिए खेलकूद की सामग्री का भी निर्माण कराया गया, जिससे बुजुर्ग महिलाएं छोटे-छोटे बच्चे खेल मैदान में योग व्यायाम दौड़ अभ्यास से वंचित हो रहे हैं।
इस मामले में पुष्पेंद्र अग्रवाल, उमेंद्र अग्रवाल, सुमन, सुनीता, मोहम्मद जावेद, बीना, संध्या, रचित अग्रवाल, इति, सौरभ अग्रवाल, बलवंत वैशाली देवी सुधा, रामपाल सिंह, प्रदीप आदि का कहना है कि मॉर्निंग वॉक के लिए सुबह के समय से ही सड़कों पर वाहनों का अधिक आवागमन होने से प्रदूषण व सड़क हादसे हो जाते हैं जिसके चलते हम सुरक्षा की दृष्टि से पंडित हृदयानंद क्रीड़ा स्थल के अंदर मॉर्निंग वॉक, व्यायाम, योगा आदि करने के लिए जाने का प्रयास करते हैं तो क्रीड़ा स्थल के मेन गेट पर ताला लगा देख कर हमें निराश होकर लौटना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र ही हृदयानंद क्रीड़ा स्थल का उद्घाटन कर शुरू करने की मांग की है।
साजन सिंह एडवोकेट का कहना है कि सरकारी मशीनरी के सुस्त रवैया के कारण हृदयानंद कीड़ा स्थल का अभी तक प्रारंभ ना होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ शुजाउद्दीन ने बताया कि वह वॉलीबॉल के खिलाड़ी रह चुके हैं। सन 1985 में बॉलीबॉल टूर्नामेंट में जिला स्तर पर ट्रॉफी जीती थी। तब के समय में भी खिलाड़ियों को खेलने के लिए कस्बा झालू में मैदान उपलब्ध नहीं थे, और आज भी खिलाड़ियों को खेलने के लिए इधर उधर मैदानों में जाना पड़ता है। इस कारण खिलाड़ियों में खेल के प्रति रुचि कम हो रही है।
डॉक्टर जीसी राय बंगाली ने बताया कि वह फुटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। झालू में मिनी स्टेडियम न चलने से खिलाड़ियों की प्रतिभा पर अंकुश लग रहा है। उन्होंने प्रशासन से स्टेडियम को शीघ्र चालू करने की मांग की।
अख्तर हुसैन का कहना है कि लगभग पिछले 35 वर्षों से क्रिकेट खेल रहे हैं। झालू में स्पोर्ट्स स्टेडियम न होने से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को उजागर करने में बहुत परेशानी पड़ती है। वह अनेक बार नगर पंचायत प्रशासन से मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम को शीघ्र चालू करने की मांग कर चुके हैं।
झालू निवासी शादाब नजर वर्तमान में एयरपोर्ट्स में एयर फोर्स में तैनात हैं तथा एयरफोर्स की तरफ से रणजी ट्रॉफी में खेल रहे हैं। उनके भाई खालिद परवेज व शरीक परवेज बताते हैं कि उनके भाई शादाब नजर को झालू में खेल का मैदान न होने के कारण अभ्यास करने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता था। अभ्यास करने के लिए जिला मुख्यालय पर स्टेडियम में जाना पढ़ता था।




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