जिंदा रहेगा रावण! बारिश ने नहीं दिया फुंकने…ऐसी खबरें कई स्थानों से आने की संभावना है। दशहरे पर भारी बारिश के कारण यूपी के कई जिलों में रावण फूंके जाने की संभावना बेहद कमजोर हो गई है। रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों को आयोजन स्थल पर खड़ा करने की प्रक्रिया कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है। कागज, खपच्चियां, कपड़ा, नायलॉन की डोरी आदि से बने इन पुतलों में भारी मात्रा में आतिशबाजी रखी जाती है। बारिश की वजह से यह भीग चुके हैं। ऐसे में इनको फूंक पाना मुश्किल ही होगा क्योंकि भीगने से बचाने के लिए पन्नी (तिरपाल) आदि से ढकने का कोई इंतजाम कहीं किया गया हो, ऐसी संभावना कम ही है। मुख्य बात ये रही कि घोर कलियुग में हर तरफ बैठे हैं रावण। सिर्फ दशहरे पर प्रतीकात्मक रूप में फूंके जाते हैं।
लखनऊ। देश के कई हिस्सों में मानसून ने विदाई के बीच दशहरे पर एक बार फिर करवट ले ली है। लखनऊ समेत आस-पास के कई जिलों में बारिश से मौसम का मिजाज ठंडा हो गया है। यूपी में राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में देर रात से लगातार बारिश जारी है। मौसम विभाग की ओर से लखनऊ सहित 51 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

लखनऊ सहित 51 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट~ राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों में मंगलवार देर रात से ही बारिश जारी है। यह सिलसिला बुधवार दिन में भी जारी है। मौसम विभाग ने लखनऊ सहित 51 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और खीरी में भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बारिश के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है। तापमान नीचे चला गया है। घरों में लोगों ने कूलर और एसी बंद कर दिए हैं।
फसल के लिए, कहीं लाभ तो कहीं हानि~ विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में पक चुकी फसलों व सब्जियों के लिए ये बारिश हानिकारक है। धान की फसल पक चुकी है। ऐसे में नुकसान होने की संभावना है, जबकि पूर्वांचल इलाके में धान की फसल इस बार विलंब से है तो उसके लिए लाभदायक है।
दस अक्टूबर तक बदला रहेगा मौसम का मिजाज~ अमौसी स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि पूर्वी यूपी में बन रहे साइकलोनिक सर्कुलेशन के चलते लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में दस अक्टूबर तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। बुधवार को बादल छाए रहेंगे और बारिश होगी। इसके अलावा बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुलतानपुर, हरदोई, कानपुर देहात, सीतापुर, लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में चमक के साथ आंधी के आसार हैं। वहीं महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर में तेज से बहुत तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। सोनभद्र, मीरजापुर, वाराणसी चंदौली और आसपास के जिलों में भी तेज बारिश के आसार हैं।

उत्तराखंड में भी अलर्ट~ पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी बारिश को लेकर 5 से 7 अक्टूबर के बीच येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए सभी को नदी और पहाड़ी नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। 7 से 8 अक्टूबर को उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी है। यात्रा करने वालों को भूस्खलन को लेकर भी चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग (IMD) की जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में छह और सात अक्टूबर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में पांच से सात अक्टूबर के बीच मध्यम से तेज बरसात होने की उम्मीद है। इसके अलावा, उत्तराखंड में छह और सात अक्टूबर को बहुत भारी बारिश की संभवाना जताई गई है।
एमपी में एक दिन पहले फूंकना पड़ा रावण~ उधर मध्य प्रदेश में सबसे पहले दमोह में बारिश के कारण रावण का दहन दशहरे से एक दिन पहले करना पड़ गया। दरअसल, 50 फीट का बनाया गया रावण धराशाई हो चुका था। लोगों ने कई बार उसे फिर से खड़ा करने की कोशिश की लेकिन वह खड़ा नहीं हो पाया। मौसम भी खराब था, इसलिए आयोजकों ने रात में ही रावण का दहन कर दिया। दमोह की श्री राम जी सेवा समिति ने तहसील मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया था। आयोजकों का कहना है कि वे पिछले 42 सालों से रावण का दहन कर रहे हैं। कोरोना के कारण 2 सालों से समिति सांकेतिक रूप से रावण का दहन कर रही थी। 2020 में 3 फीट का रावण जलाया गया था तो 2021 में 8 फीट का रावण दहन किया। इस साल कोई प्रतिबंध नहीं था, इसलिए 50 फीट का रावण बनाया था। मंगलवार दोपहर हुई बारिश में भीगने के कारण रावण का पुतला जमींदोज हो गया। बारिश थमने के बाद रावण को फिर से खड़ा करने के कई प्रयास किए लेकिन रात में करीब 9.30 बजे फिर से बारिश शुरू हो गई। रावण दहन के लिए भगवान श्री राम की जीवंत झांकी के साथ रामदल गल्ला मंडी से निकल गया था। राम दल तहसील ग्राउंड पहुंचने वाला था, आयोजन देखने आए लोग भी वहां से चले गए। इसके बाद आयोजन समिति से जुड़े कुछ लोगों ने बारिश में भीगते हुए इस परंपरा का निर्वाह किया। धराशाई हो चुके आधे-अधूरे रावण को ही दहन करके परंपरा निभाई गई।
मरना तो होगा दहन होकर या डूब कर~ इस बीच राजधानी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-13 में हो रही द्वारका श्रीरामलीला सोसायटी के संयोजक राजेश गहलोत के अनुसार हमारे रावण का पुतला 95 फुट का है। मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों की ऊंचाई भी 90 और 85 फुट है। इतने बड़े पुतलों को लेकर बारिश से बचाने का कोई इंतजाम नहीं हो सकता। पुतलों का दहन इंडोर में नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब यह राम जी और मौसम तय करेंगे कि इस साल रावण दहन होकर मरेगा या डूब कर। हम बस उम्मीद कर सकते हैं कि बारिश न हो।
Leave a comment