
भारतीय जैव विविधता पुरस्कार के लिये ज्यूरी के दो सदस्यों ने किया निरीक्षण
बिजनौर। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और यूएनडीपी द्वारा वर्ष 2023 में दिये जाने वाले “भारतीय जैव विविधता पुरस्कार” के लिये कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल यूज़ ऑफ बायोलॉजिकल रिसोर्सेस श्रेणी में नामित बिजनौर जनपद के स्योहारा ब्लॉक में खानपुर माइनर वॉटर यूज़र्स एसोसिएशन के कार्यों का निरीक्षण ज्यूरी के दो सदस्यों डॉ एके भारद्वाज एवं श्रीमती श्रुति शर्मा द्वारा किया गया।

डब्लूडब्लूएफ इंडिया, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन बिजनौर के सहयोग से चलाए जा रहे कार्यक्रम में खानपुर माइनर के अंतर्गत आने वाले 4 गांव खानपुर, मीरापुर, कोला सागर और रहटौली क्षेत्र में दो सदस्यीय टीम और डीएफओ बिजनौर डॉ अनिल पटेल ने भ्रमण किया। इनके द्वारा खानपुर माइनर के अंतर्गत किए गए कार्यों का अवलोकन किया गया और जल उपभोक्ता समिति खानपुर माइनर के सदस्यों एवं जागरूक किसानों के साथ बैठक की गई। इस दौरान खानपुर माइनर के अंतर्गत किसानों ने टीम के सदस्यों को ट्रेंच के द्वारा गन्ने की खेती के बारे में काफी विस्तार से बताया और टीम को खेत में ले जाकर के ट्रेंचर के द्वारा गन्ने की बुवाई किए गए खेतों को दिखाया कि किस तरह से किसान लोग 4 से 5 फीट की दूरी पर गन्ने की बुवाई कर रहे हैं और साथ में सह-फसली भी ले रहे हैं। रबी के सीजन में सरसों आलू आदि सह-फसली के रूप में किसानों ने खेत में बुवाई करी थी और उससे लाभ अर्जित किया था।

इसके अलावा जायद वाली फसल में किसानों ने जब बुआई करी थी तो उसमें सह-फसली के रूप में उरद एवं मूंग आदि फसलों की बुआई की थी। इसके अलावा किसानों ने टीम के सदस्यों को खानपुर माइनर से सिंचाई मे बचे हुए पानी के बारे मे जानकारी दी कि किस तरह उन्होंने सिंचाई के उन्नत तरीकों को अपनाते हुए जो पानी बचत किया था उसको करुला नदी में डाला है।
इसके लिए नदी तक एक रास्ते का निर्माण किया गया था, जिसमें डब्लूडब्लूएफ इंडिया, सिंचाई विभाग और खानपुर माइनर के सभी सदस्यों एवं किसानों ने सहयोग किया था क्योंकि पहले टेल के क्षेत्र में खानपुर माइनर का पानी आकर के अगल-बगल के खेतों में भर जाता था, जिससे किसानों का काफी नुकसान होता था और जब करुला नदी तक जाने के लिए इसका निर्माण हुआ है तब से उन किसानों की पैदावार भी अच्छी होने लगी है और करुला नदी जो कि गर्मी के समय में सूख सी जाती थी उसमें भी अब अनवरत पानी मिलता है।

अभी तक करुला नदी में 8 करोड़ लीटर पानी सिंचाई से बचाने के बाद नदी में जा चुका है। डॉ अनिल पटेल डीएफओ बिजनौर ने क्षेत्र के 4 गांव में किसानों के द्वारा ट्रेंच विधी से की जा रही गन्ने की खेती की काफी सराहना किया और साथ में यह भी बताया कि ट्रेच विधी में जो 4 से 5 फिट कतार के हिसाब से बुआई की जाती है, वो किस तरह से जंगली जानवर जैसे तेंदुआ या बाघ आदि अन्य जानवर यदि गन्ने की खेत में आ जाते हैं, उनको समय रहते देखा जा सकेगा और कई तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। यह मानव और जंगली जानवरों के बीच होने वाले संघर्ष से भी काफी निजात दिला सकेगा, यदि किसान गन्ने की बुवाई ट्रेंचर के द्वारा 4 से 5 फीट की दूरी पर नियमित रूप से करें। इस सर्वे के दौरान खानपुर माइनर समिति के सदस्य, गांव के जागरूक किसान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की टीम, उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और वन विभाग से डीएफओ बिजनौर डॉ अनिल पटेल, धामपुर रेंज के रेंजर गोविंदराम एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।
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