
संचारी रोग के प्रसार हेतु अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछूंदर भी उत्तरदाई: जिला कृषि रक्षा अधिकारी
स्क्रब टायफस बीमारी चूहा एवं छछूंदर से फैलती, नियन्त्रण हेतु उपाय व सावधानियां अपनाएं- जिला कृषि रक्षा अधिकारी
6 दिवसीय योजना बनाकर चूहों पर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है- जिला कृषि रक्षा अधिकारी बिजनौर मनोज रावत
बिजनौर। संचारी रोग नियंत्रण अभियान (1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022) के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण हेतु व्यापक कार्यक्रम/अभियान संचालित किया जा रहा है। संचारी रोग के प्रसार हेतु अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछूंदर आदि भी उत्तरदायी हैं। स्क्रब टायफस बीमारी चूहा एवं छछूंदर से फैलती है। इसलिए यह आवश्यक है कि इनकी रोकथाम हेतु आवासीय घरों एवं इसके आसपास के क्षेत्रों को चूहा एवं छछूंदर से मुक्त रहें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी बिजनौर मनोज रावत ने कृषकों को अवगत कराते हुए बताया कि चूहों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए अन्न भंडारण पक्का कंक्रीट तथा धातु से बने पात्रों में करना चाहिए ताकि उनको भोज्य पदार्थ सुगमता से उपलब्ध न हो सके। चूहे अपना बिल झाड़ियों, कुडों एवं मेड़ों आदि में स्थाई रूप से बनाते हैं, इसलिये खेतों का समय-समय पर निरीक्षण एवं साफ सफाई करके इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। चूहेदानी का प्रयोग करके व घरों में ब्रोमोडियोलान 0-005 प्रतिशत के बने चारे की 10 ग्राम मात्रा का प्रयोग चूहों पर नियंत्रण किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि 6 दिवसीय योजना बनाकर चूहों पर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। प्रथम दिन- आवासीय घरों एवं आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण एवं बिलों को बंद करते हुए चिन्हित करें। दूसरा दिन- निरीक्षण कर जो बिल बंद हो वहां चिन्ह मिटा दें, जहां पर बिल खुले पाए जाएं वहां चिन्ह रहने दे खुले बिल में एक भाग सरसों का तेल एवं 48 भाग भुने दाने का चारा (बिना जहर मिलाएं) बिल में रखें।
उन्होंने बताया कि तीसरा दिन- बिलों का निरीक्षण कर बिना जहर का चारा पुनः रखें। चौथे दिन – जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत की 1 ग्राम मात्रा को 1 ग्राम सरसों का तेल एवं 48 ग्राम भुने दाने को मिलाकर बनाए गए चारे को बिल में रखें। पांचवे दिन- बिलों का निरीक्षण करें एवं मरे हुए चूहे को एकत्र कर जमीन में गाड़ दें। छठे दिन- बिलों को पुनः बंद करें तथा अगले दिन यदि बिल खुले पाए जाएं तो उपरोक्त कार्यक्रम पुनः अपनाएं।
उन्होंने बताया कि चूहा नियंत्रण के दौरान सावधानियां भी बरतनी चाहिएं। चूहा नियंत्रण रसायनों का प्रयोग करते समय हाथ में दस्ताने पहने। रसायनों को बच्चों एवं जानवरों की पहुंच से दूर रखें। मरे हुए चूहे को घर से बाहर सावधानीपूर्वक मिट्टी में दबा दें। दवा के प्रयोग के दौरान घर में रखी खाद्य सामग्री इत्यादि को अच्छी तरह से ढक दें।
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