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उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही 4 दिन से चल रहे लोक आस्था के खास महापर्व छठ का समापन। व्रती महिलाओं ने को परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना।

बिजनौर। उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही 4 दिनों से चल रहे लोक आस्था के खास महापर्व छठ का समापन हो गया। नदियों, तालाबों में व्रती महिलाओं ने उदयाचलगामी भगवान भास्कर (उगते हुए सूर्य) को अर्घ्य दिया। इसी के साथ चार दिवसीय महापर्व संपन्न हो गया। गंगा बैराज, विदुर कुटी गंज, बालावाली सहित जिले की सभी नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नदियों, तालाबों से लेकर घरों के अहाते में और छतों पर बने कृत्रिम जलाशयों तक के आसपास परंपरा का निर्वहन किया गया। सूर्यदेव और छठ मैया की उपासना कर व्रती महिलाओं ने परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना की।

व्रती महिलाएं तड़के चार बजे से ही सिर पर प्रसाद की टोकरी रख परिवार के साथ नंगे पैर गंगा घाटों पर पहुंची और विधि-विधान से छठी मइया की पूजा अर्चना की। पवित्र नदी में डुबकी लगाई। भीगे वस्त्र में और हाथों में फल पकवानों से लदी टोकरी के साथ व्रतियों ने सूर्य देव की आराधना की। अंत में उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने परिवार की खुशहाली के लिए कामना की। साथ में बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी थे। सभी ने पूजन में सहयोग किया। महिलाएं मांग से लेकर पूरी नाक तक सिंदूर लगाए थीं। इस दौरान घाटों पर छठ मैया के गीत गूंजते रहे।

विदित हो कि चार दिन चलने वाले छठ पर्व के पहले दिन नहाय-खाय यानी पवित्र स्नान करके शुद्ध सात्विक भोजन की परंपरा है। दूसरे दिन खरना पूजा होती है, यह भी शुद्धता का प्रतीक है। इसके बाद व्रत करने वाले लोग- महिलाएं और पुरुष 36 घंटे निर्जला यानी एक बूंद पानी पिए बगैर उपवास रखते हैं। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत संपन्न करने की परंपरा है। इससे जुड़े नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है। छठ पर्व ऐसा पर्व है जिसमें कोई कर्मकांड नहीं है, केवल श्रद्धा है, उल्लास है और सूर्य देवता के प्रति अटूट आस्था है।

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