
पराली जलाने पर प्रतिबंध का पूर्णतया हो पालन~डीएम
कटाई के दौरान गन्ने की पत्तियों को जलाने की एक भी घटना प्रकाश में न आये-जिलाधिकारी
बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने गन्ना व अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि गन्ने की कटाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाये कि गन्ने की पत्तियों को जलाये जाने की एक भी घटना प्रकाश में न आये। उन्होंने कहा कि गन्ना कटाई की अवधि के दौरान एस. ओ. पी. का उल्लंघन करते हुये यदि कृषकों के द्वारा फसल अवशेष जलाये जाने की घटनाएं प्रकाश में आती हैं, तो नियमानुसार व प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जाये। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता को अत्यन्त गम्भीरता से लिया जायेगा ।
उन्होंने कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण में योजित वादों के क्रम में निर्गत आदेशों के अनुपालन में कार्यवाही सुनिश्चित की ंजाये। उन्होंने कहा कि खरीफ मे धान फसल की कटाई के पश्चात् गेंहूं की बुवाई प्रगति पर है । धान की फसल के अवशेष का अब तक प्रबंधन कुशलतापूर्वक किया गया है। उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी को निर्देशित किया कि पिछले वर्ष जिन गन्ना उत्पादक कृषकों के खेत में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं प्रकाश में आयी थी उनका विवरण भी मुख्य पशु बिजनौर को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी को निर्देशित किया कि वर्ष 2022- 23 में गन्ने की कटाई प्रारम्भ होने से लेकर कटाई समाप्त होने तक गन्ने की पाती के विक्रय की प्रगति उप कृषि निदेशक, बिजनौर को निर्धारित प्रारूप पर साप्ताहिक रूप से प्रस्तुत करें। इसके साथ-साथ गन्ना कटाई की अवधि में गन्ना उत्पादक कृषकों के प्रक्षेत्रों पर गहन निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि वह गन्ने की पाती/अवशेष को खेतों में न जलाने पाये तथा गन्ना फसल अवशेषों को निर्धारित मूल्य पर पशुपालन विभाग की गोशालाओं में विक्रय करना सुनिश्चित करें।
गौरतलब है कि दो एकड़ तक खेत में पराली जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ खेत में पराली जलाने पर 5000 हजार रुपये तक और 05 एकड़ से अधिक खेत में पराली जलाने पर 15 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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