एक ऐसी घटना जिसने बदल डाली जिंदगी, 22 लाख रुपए की नौकरी छोड़ बने आईपीएस
बिजनौर/उरई जालौन। बागपत से स्थानांतरित होकर बिजनौर आने वाले एसपी नीरज कुमार जादौन का जीवन एक ऐसी घटना ने बदल दिया कि उन्होंने आईपीएस बनने की ठानी। वर्ष 2008 में ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी में 22 लाख रुपये पैकेज पर नौकरी कर रहे थे। परिवार में एक घटना होने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी कर आईपीएस बन गए।


6 दिसंबर 2008 वो तारीख है जिसने नीरज कुमार जादौन की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी। वो इस तारीख को कभी भूल नहीं सकते।
नीरज कुमार जादौन आईआईटी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद वर्ष 2008 में ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी में 22 लाख रुपये पैकेज पर नौकरी कर रहे थे। इस दौरान 6 दिसंबर 2008 को खेत के विवाद में पिता नरेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। तब महज 25 वर्षीय नीरज ने मां आशा, बहन उपासना, भाई पंकज, रोहित व राहुल को संभाला। साथ ही पिता को इंसाफ दिलाने के लिए केस भी लड़ा। उनकी मदद करने की बजाय पुलिस आरोपियों का साथ दे रही थी। इस पर इंसाफ हासिल करने के लिए उन्होंने आईपीएस बनने की ठान ली।
आरोपियों का साथ दे रही थी पुलिस
पिता की हत्या के बाद नीरज कुमार जादौन ने कोर्ट कचहरी के खूब चक्कर लगाए। केस की पैरवी शुरू की तो पीड़ित की मदद करने की बजाय पुलिस आरोपियों का साथ दे रही थी। इस पर पिता को इंसाफ दिलाने की गरज से नीरज ने आईपीएस बनने की ठान ली। उन्होंने ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी की नौकरी में रहते हुए वर्ष 2010 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2011 में पहले ही प्रयास में एग्जाम पास किया और साक्षात्कार तक पहुंचे, मगर सफलता नहीं मिली।
छोड़ी 22 लाख रुपए की नौकरी
दूसरे प्रयास में रैंक कम मिली। फिर 22 लाख के पैकेज की नौकरी छोड़कर तीसरी और अंतिम बार प्रयास किया। इस बार 140 वीं रैंक हासिल कर नीरज आईपीएस बन गए। इसके बाद वह अलीगढ़, गाजियाबाद, हापुड़ समेत कई जगह के अलावा फिलहाल बागपत एसपी पद पर रहे। उनके भाई पंकज व रोहित सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। राहुल व बहन उपासना हाईकोर्ट में वकालत करते हैं।
जिला जालौन के रहने वाले है IPS नीरज कुमार जादौन
नीरज कुमार जादौन मूलरूप से यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र अंतर्गत जालौन जिले के नौरेजपुर गांव निवासी हैं। नरेंद्र सिंह जादौन और आशा देवी के पांच बच्चों में सबसे बड़े नीरज कुमार का जन्म 01 जनवरी 1983 को कानपुर में हुआ। यहीं से स्कूल, आइआइटी, बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री लेकर एमएनसी ज्वॉइन कर ली। 2005 में बीटेक करने के बाद नीरज की नौकरी नोएडा की एक कंपनी में लग गई। वहां उन्होंने एक साल तक काम करने के बाद वर्ष 2008 में ब्रिटिश टेलिकॉम कंपनी की बेंगुलरु ब्रांच में 22 लाख रुपए के पैकेज पर नौकरी शुरू की।


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