फिरोजाबाद में सपा नेता महबूब अजीज की पत्नी रुखसाना बेगम बसपा से मेयर प्रत्याशी
सपा नेता की पत्नी को टिकट देकर बसपा ने खेला तगड़ा दांव
लखनऊ। फिरोजाबाद में सपा नेता की पत्नी को टिकट देकर बसपा ने तगड़ा दांव खेला है। सपा से पूर्व पार्षद महबूब अजीज की पत्नी रुखसाना बेगम अब्बासी को बसपा ने केमहापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। बसपा की इस रणनीति के चलते समाजवादी पार्टी की मजबूत जमीन माने जाने वाले इस जिले में निकाय चुनाव टक्कर का होने वाला है।
गौरतलब है कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर जिले के आठ निकायों में से सात पर प्रत्याशी घोषित किए थे। बसपा के मंडल कोआर्डिनेटर हेमंत प्रताप सिंह, डॉ. ज्ञान सिंह, पूर्व विधायक अजीम भाई एवं जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उर्फ सोनू भारती ने सीबी गेस्ट हाउस में वार्ता करते हुए प्रत्याशियों की घोषणा की। फिरोजाबाद नगर निगम से पूर्व में मुलायम सिंह यूथ बिग्रेड के अध्यक्ष और सपा से दो बार सभासद रह चुके महबूब अजीज की पत्नी रुखसाना बेगम अब्बासी को महापौर का प्रत्याशी बनाया गया। महबूब अजीज सपा नेता आजम खान के करीबी बताए जाते हैं।

मंडल कोआर्डिनेटर हेमंत प्रताप सिंह के अनुसार पार्टी ने सभी वर्गों को समाहित करते हुए बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशी तय किए हैं। उन्होंने बताया कि महबूब अजीज टिकट मिलने से पूर्व तक समाजवादी पार्टी में सक्रिय थे। पूर्व विधायक अजीम भाई के साथ ही वह बसपा में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा शिकोहाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए अनीता यादव पत्नी इंद्रजीत यादव, सिरसागंज नगर पालिका से नकीर अहमद को प्रत्याशी बनाया गया है। टूंडला नगर पालिका से चेयरमैन पद का प्रत्याशी वर्तमान में भाजपा से चेयरमैन रामबहादुर चक के बेटे रोहित चक को बनाया है। नगर पंचायत फरिहा में सपा से चेयरमैन बने अब्दुल हई की पत्नी मोमिना यास्मीन को प्रत्याशी बनाया है। नगर पंचायत मक्खनपुर से प्रधान रहे स्वर्गीय महेशचंद्र जाटव की पत्नी मुन्नीदेवी अध्यक्ष पद की उम्मीदवार हैं, जबकि जसराना नगर पंचायत से वारिस अहमद को चेयरमैन पद पर प्रत्याशी घोषित हैं।

साइकिल छोड़ कर ये हुए हाथी पर सवार ~
समाजवादी पार्टी से नगर पंचायत अध्यक्ष का टिकट न मिलने पर वारिस सिद्दीकी साइकिल छोड़ हाथी पर सवार हो गए। उनका कहना है कि वह सपा नेतृत्व का फैसला था, यह उनका फैसला है। उनका प्रमुख उद्देश्य जनता की सेवा करना है। इससे पहले भी वह सपा से बगावत कर चुनाव लड़ चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन सपा ने केपी सिंह यादव पर भरोसा जताया तो वारिस ने बगावत कर दी। 2017 के नगर निकाय चुनाव में टिकट नहीं मिलने वह निर्दलीय मैदान में उतरे और दूसरे स्थान पर रहे, सपा तीसरे स्थान पर रही थी। इसी तरह 1992 में सपा से जुड़े फरिहा चेयरमैन अब्दुल हई ने 30 साल बाद आखिरकार सपा छोड़ कर बीएसपी ज्वाइन कर ली। वर्ष 2017 में सपा के टिकट पर चेयरमैन बने अब्दुल हई सपा छोड़ने पर अफसोस करते हुए लगातार काम करने के बाद टिकट न मिलना गलत बताते हैं। उनकी पत्नी मोमिना यास्मीन को प्रत्याशी बनाया गया है।
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