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चुनावी चकल्लस

~हर्यश्व सिंह सज्जन

….और बदल गए देवर के तेवर

निकाय चुनाव में मतदान का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, नए-नए रंग देखने को मिल रहे हैं। एक दावेदार को जब टिकट नहीं मिला तो पति समेत पाला बदल दूसरे दल का दामन थाम प्रत्याशी बन गई। सामने उनके पति की पूर्व राजनीतिक आका की पुत्री उनकी मूल पार्टी से टिकट पाने में कामयाब रही। बात यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहां से शुरू होती है। औरों को तो छोड़िए, उनका देवर ही अब उनके खिलाफ खड़ा है। देवर अपनी मूल पार्टी की प्रत्याशी को दिल-ओ- जान से चुनाव लड़ा रहा है। लोग कह रहे हैं कि प्रत्याशी पति का भाई ही घर में विभीषण हो गया है। एक भाई जहां एक राजनीतिक दल का हत्था पकड़कर चेयरपर्सन पति बनने का सपना देख रहा है, वहीं सगा दूसरा भाई उस सपने को रौंदने पर लगा है। खुलकर दूसरे प्रत्याशी का चुनाव लड़ा रहा है। प्रत्याशी पति ने तो उसको भाई तक मानने से इनकार कर उसको अपने पिता की दूसरी औलाद घोषित कर दिया। लेकिन, प्रत्याशी अपने देवर के इस बदले हुए रुख से भौचक बताई जा रही हैं। उधर, शहर के लोग कह रहे हैं कि जो अपने घर को ही नहीं जोड़ पाया, वो पूरे शहर को कैसे जोड़ेगा?

तुम तो ठहरे परदेशी, साथ क्या निभाओंगे…

जिले में एक निकाय में एक प्रत्याशी मैदान में है। पिछली बार भी नगर पालिका चेयरमैनी उनके घर में ही थी। लेकिन, जीतते ही वर्तमान प्रत्याशी नगर छोड़कर अपने कारोबार के सिलसिले में विदेश में जा बसे। नगरवासी होली, दिवाली, ईद, गुरुपर्व, क्रिसमस पर तरसी निगाहों से उनकी बांट जोहती रही, लेकिन पूरे पांच साल वह नजर नहीं आए। ऊपर से उनके घर के बाहर लगा एक बोर्ड भी लोगों के बीच सुर्खियां बना हुआ है। उनकी इस छवि को देखते हुए और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर उनकी पार्टी हाइकमान ने उनसे किनारा कर दूसरे को टिकट दे दिया। लेकिन, वह अन्य दल से टिकट पाने में सफल होकर मैदान में आ डटे। अब हर सभा में बताते फिर रहे है कि इस बार मैं ही मैदान में हूं, मेरे परिजन नहीं। जीतने के बाद यहीं रहूंगा। लेकिन, जनता उन पर यकीन करने को तैयार नहीं है। इससे पहले भी यह बात उनके सामने आई थी, तब भी उन्होंने यही कहा था। सामने सब हां-हां कर रहे हैं, लेकिन उनकी पीठ पर ही अल्ताफ रजा का गाना गुनगुना देते हैं कि तुम तो ठहरे परदेशी….

तीर्थयात्रा पर गए निवर्तमान चेयरमैन, समर्थक मौन

जिले के एक निकाय में निवर्तमान चेयरमैन और उनकी पत्नी दोनों टिकट के दावेदार थे। पत्नी पार्टी में पदाधिकारी भी है। उनको अपने पांच साल में कराए गए कामों के चलते यकीन था कि इस बार भी चेयरमैनी उनके घर में ही रहेगी। लेकिन, अंदरुनी राजनीति के चलते सबसे प्रबल दावेदार होने के बावजूद उनका टिकट काटकर एक पुरानी चेयरपर्सन को दे दिया गया। पुरानी चेयरपर्सन पार्टी से बगावत कर पार्टी के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुकीं हैं। लेकिन, संबंधों के आधार पर पार्टी में वापस जगह बनाने में सफल हो गई थी। ऐसे में निवर्तमान चेयरमैन अपने परिवार और कुछ खास समर्थकों के साथ तीर्थयात्रा के लिए देशाटन पर निकल गए हैं। सोशल मीडिया के सहारे उनके पर्यटन की खबरें नगर के लोगों के बीच पहुंच रही हैं। उनके समर्थक कार्यकर्ता दिखावे के लिए चुनाव में लगे हैं और कट्टर समर्थक अभी तक उनके इशारे का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि अपने नेता को टिकट ना मिलने का बदला वह विपक्षी प्रत्याशी को वोट देकर ले सकते हैं।

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