~Avnish Tyagi, @targettv

स्थानीय निकाय चुनाव और भ्रष्ट लोकतंत्र
स्थानीय निकाय चुनाव देश के लोकतंत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यह चुनाव नागरिकों को मुख्य नेताओं और नगर परिषदों के मंडलों का चयन करने का मौका देते हैं। इन नगर परिषदों का अध्यक्ष क्षेत्र के विकास के लिए नीतियों का निर्धारण करता है, सार्वजनिक मुद्दों के लिए पुख्ता प्रतिनिधित्व उपलब्ध करवाता है और संचार प्रणाली को सुधारने के लिए नीतियों को लागू करता है। इन सभी कार्यों के लिए स्थानीय निकाय के चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
कम होता जा रहा विश्वास~ लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद भारत में स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर भ्रष्टाचार से ग्रसित होते हुए देखे जाते हैं। नेताओं का भ्रष्ट व्यवहार, घोटालों और आरोपों के कारण नागरिकों का इन पर विश्वास कम होता जा रहा है। यह नकारात्मक प्रभाव न केवल स्थानीय निकायों के विकास को रोकता है, बल्कि उनकी उपयोगिता भी कम होती है।
तकनीक बने सुअवसर~ भ्रष्टाचार से ग्रसित स्थानीय निकाय चुनावों को नई तकनीक के जरिए लोकतंत्र के स्तर को सुधारने का अवसर बनाया जा सकता है। इलेक्शन फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सामाजिक मीडिया प्लेटफार्म या ऑनलाइन कुंजिका शुरू करके लोगों को निकायों के कार्यों के प्रति संवेदनशील कर सकते हैं।

शिक्षण कार्यक्रम~ एक महत्वपूर्ण उपाय यह हो सकता है कि चुनाव आयोग स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अधिक आवश्यक नेतृत्व प्रदान करे। इसके लिए, चुनाव आयोग नियमों और अनुशासन का पालन करने के लिए स्थानीय निकाय नेताओं के लिए वैध रूप से शिक्षा कार्यक्रम आयोजित कर सकता है, ताकि भ्रष्टाचार जैसे अपराध को कम किया जा सके।
ईमानदारी जरूरी~ स्थानीय निकाय चुनाव और भ्रष्ट लोकतंत्र के बारे में सम्मति है कि अगर स्थानीय निकाय नेताओं को पारदर्शिता, संपादकीय स्वतंत्रता, निर्भय योजनाएं और कार्यों का निष्पक्ष नियंत्रण मिला तो भारत की स्थानीय संस्थाओं में विकास देखा जा सकता है। इसलिए, देश में स्थानीय निकाय चुनावों को निर्देशित करने वाले लोगों को सशक्त और ईमानदार होना चाहिए, ताकि देश की जनता के श्रद्धा के भार से महत्वपूर्ण फैसलों को निर्धारित कर सकें।
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