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हजरत राहत अली शाह की जियारत पर उनकी याद में कव्वाली का आयोजन

इल्म की रोशनी से देख रात भी सुबह नजर आयेगी

बिजनौर। हजरत राहत अली शाह की जियारत पर उनकी याद में कव्वाली का आयोजन किया गया। कव्वाली का उद्घाटन समाजसेवी नईम अहमद एडवोकेट व ग्राम प्रधान पति के भांजे शाहरुख़ फरीदी ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया।

राजा का ताजपुर के मोहल्ला खद्दर बाजार में हर साल की तरह इस बार भी हजरत राहत अली शाह की जियारत पर उनकी याद में कव्वाली का आयोजन किया गया। रात भर चले कव्वाली मुकाबले में खूब वाहवाही लूटी गई। इकबाल साबरी ने देश भक्ति कव्वाली सुना कर लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि अंधेरे चिरागों से ना दूर हुए हैं ना होंगे इल्म की रोशनी से देख रात भी सुबह नजर आयेगी। फरीदा परवीन ने कहा बहेक जाने दे मुझे मेरे मुल्क की मोहब्बत में, ये वो नशा है जो मेरे सर से कभी उतरता नहीं, मुल्ला क्यों अजान देता है, पुजारी क्यूं घंटा टनटनता है, हैवानों की बस्ती है यहां पर फरियाद कौन सुनता है।

नईम अहमद एडवोकेट ने बताया कि हजरत राहत अली शाह के मजार पर सैकड़ों सालों से कव्वाली का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी धर्मों के लोग अपनी मुरादे मांगते हैं। यहां पर उनकी हर मुराद पूरी होती है। हजरत अली शाह की जियारत एकता भाईचारे की एक मिसाल है। हजरत अली शाह सात भाई थे, जिनके जियारत ताजपुर क्षेत्र के अलग-अलग जगह पर हैं। यह लोग अच्छे नेक बुजुर्गों में थे, जिन्होंने अपनी करामात से लोगों को ईमान में दाखिल किया। इसलिए सैकड़ों साल के बाद भी उनको याद किया जाता है। इस मौके पर अफजाल फरीदी, साबिर सिद्दीकी, आसिफ सिद्दीकी, फारुख सिद्दीकी, समाजसेवी शुभम वालिया आदि कमेटी के लोग मौजूद रहे।

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