आमजन की शिकायत के बावजूद इन पर नहीं होती कार्यवाही
पत्रकार को कोसने के बजाय अपना दायित्व भी समझें
अधिकारियों की मिलीभगत से मनमानी करते हैं राशन डीलर!
~स्वतंत्र पत्रकार अनिल सैनी
बिजनौर। प्रशासन भ्रष्टाचार रोकने के लिए चाहे कितने ही नियम बना ले, पर भ्रष्टाचारी लोग उसका तोड़ निकाल लेते हैं। प्रशासन कितने ही बड़े बड़े दावे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का करता है, पर उसी प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत से निरंतर भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए बायोमेट्रिक अंगूठे के निशान से राशन देने का प्रावधान लागू किया और राशन डीलरों को मशीन उपलब्ध करायी गई। ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके और पारदर्शिता के साथ आमजन को पूरा राशन मिल सके। …लेकिन जिनको आदत पड़ चुकी है भ्रष्टाचार की काली कमाई खाने की, तो वह भला शांत कैसे रह सकते हैं।
हर नागरिक को पता होता है कि प्रदेश सरकार 5 किलो राशन प्रति यूनिट मुहैया करा रही है जिसमें गेहूं और चावल सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीयत साफ है वह अपने प्रदेश के हर गरीब व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना चाहते हैं लेकिन कुछ भ्रष्ट लोगों की वजह से गरीब आमजन परेशान है। उनको मिलने वाला हक राशन डीलर और संबंधित अधिकारियों की जेब में जा रहा है।

आइए हम आपको बताते हैं कि एक राशन डीलर किस प्रकार से करता है भ्रष्टाचार…
~कम माप, जी हां आप को कम राशन दिया जाता है आपकी यूनिट से कम राशन आप को दिया जाता है।
~भोले भाले व्यक्तियों के राशन कार्ड में अन्य व्यक्तियों के नाम जोड़कर बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठा लगवाया जाता है, जिसमें राशन कार्ड धारक के परिवार के यूनिट ही दिए जाते हैं बाकी यूनिट राशन डीलर डकार जाता है।
~मशीन पर अंगूठा नहीं आया, कह कर राशन कार्ड धारक से चक्कर लगवाए जाते हैं और एक महीने का राशन गायब कर दिया जाता है।
~राशन डीलर के पास जो मशीन होती है उसमें स्लिप निकलती है। यह राशन कार्ड धारक को दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन राशन डीलर द्वारा वह स्लिप राशन कार्ड धारक को नहीं दी जाती है। अगर राशन कार्ड धारक को उसको मिलने वाले राशन की स्लिप मिल जाए तो साफ पता चल जाता है कि एक राशन डीलर उनके कार्ड से कितना यूनिट निकाल रहा है।
~और यह आलम हर राशन डीलर का है। प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल खुलेआम चल रहा है। जो वास्तविकता में गरीब और पात्र व्यक्ति हैं उनके नाम कहीं और राशन कार्ड में जुड़े होते हैं, जिस कारण से वह अपना राशन कार्ड नहीं बनवा पा रहे हैं।
पत्रकारों को तो बहुत कोसा जाता है, लेकिन उनके आम जनहित लेख को कोई फॉरवर्ड करना नहीं चाहता है।
कारण कुछ खुद राशन डीलर के रिश्तेदार होते हैं, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के रिश्तेदार होते हैं। कुछ पार्टी के कार्यकर्ता होते हैं। इस कारण आमजन तक उनके अधिकार की जानकारी नहीं पहुंचाई जाती है। अगर आप वास्तविकता में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं या खत्म करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करिए, जागरूक करिए। प्रत्येक राशन कार्ड धारक चैक कराए कि उसके कार्ड में कितने यूनिट जुड़े हुए हैं? बायोमेट्रिक कराते हुए राशन डीलर से स्लिप लें, आपको पता चलेगा कि कितने यूनिट की स्लिप आपको दी गई है। अब पत्रकारों पर उंगली उठाना बंद करें अपना कर्तव्य भी समझें। ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि उच्च अधिकारियों तक यह बात पहुंच सके और वह इस पर एक्शन लें ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके और पात्र व्यक्ति के नाम किसी अन्य राशन कार्ड में चल रहे हैं और वह अपने परिवार का कार्ड नहीं बना पा रहे हैं तो वह भी अपना राशन बनवा सकें।
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