समन्वय समिति ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
अनावश्यक दबाव से ग्राम पंचायत सचिव हो रहे अवसादग्रस्त
सीडीओ के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं ग्राम पंचायत सचिव!
बिजनौर। जिले में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी अनावश्यक दबाव से परेशान होकर मानसिक तनाव झेल रहे हैं। यही नहीं एक और बड़ी समस्या ये है कि जिला स्तरीय एक वरिष्ठ अधिकारी अधीनस्थों के साथ गाली-गलौच मारपीट तक करने पर उतारू रहते हैं। ऐसे में विकास कार्य से जुड़े इस विभाग के खेवनहार हतप्रभ भी हैं और अवसादग्रस्त भी। दो दिन पहले इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति का गठन करते हुए जिलाधिकारी से मिलकर अपनी व्यथा सुनाने का निर्णय लिया गया था।

इसी क्रम में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति की ओर से मंगलवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ग्राम पंचायत सचिवों को कार्यों के क्रियान्वयन में आ रही परेशानियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उनके निदान की मांग की गई। डीएम ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और निस्तारण का आश्वासन भी दिया।
ज्ञापन में विशेषकर तीन मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। कहा गया कि मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर द्वारा क्षेत्र में अधीनस्थों के साथ गाली-गलौच मारपीट की जाती है, उक्त परिस्थितियों में सचिव उनके साथ कार्य करने में समर्थ नहीं हैं। गौशाला में कार्याधिकता होने के कारण गौशाला वाली पंचायत पर एक पूर्णकालिक सचिव की तैनाती की जानी चाहिए। इसके अलावा ज्ञापन में बताया गया कि धनाभाव / प्रशिक्षण के अभाव के बावजूद उच्चाधिकारियों द्वारा कार्य का दवाब बनाया जाता है, जिससे सचिव मानसिक अवसादग्रस्त हो रहे हैं। जिलाधिकारी से उक्त समस्याओं के समाधान की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में समन्वय समिति के अध्यक्ष धीरज सिंह, मंत्री अक्षय कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव पोरस, ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष कुलदीप राजपूत, जिला मंत्री संजय सिंह, ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष एकेश्वर सुंदरियाल, जिला मंत्री अरविंद आदि शामिल थे।
गौरतलब है कि निरीक्षण के वक्त रामपुर चाठा पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी को थप्पड़ मारने का आरोप सीडीओ पूर्ण वोरा पर लगा था। ग्राम विकास अधिकारी को थप्पड़ जड़ने और कान पकड़ कर उठक बैठक लगवाने के इस घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज भी वायरल हुई। इसी घटना को लेकर ग्राम पंचायत अधिकारियों और सचिवों ने एक हफ्ते पहले मुख्य विकास अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विकास भवन और कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन तक किया गया। आंदोलनकारी; सीडीओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और ट्रांसफर की मांग पर अड़ गए थे। अंततोगत्वा डीएम उमेश मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद मामला किसी हद तक शांत तो हुआ, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चिंगारी अभी भी सुलग रही है।
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