रामगंगा नहर में गिरी स्कूली बस की जांच में खुलासा
जुगाड़ वाहन में ढोए जा रहे थे मासूम बच्चे!
बिजनौर। स्योहारा क्षेत्र में रामगंगा नहर में गिरी स्कूली बस दरअसल जुगाड़ वाहन है। एआरटीओ की जांच में यह बात सामने आई है। कुल मिलाकर विभागीय हीलाहवाली और स्कूल प्रबंधन की धनलिप्सा के चलते इस वाहन में मासूम बच्चे ढोए जा रहे थे।
एआरटीओ गौरीशंकर अपनी टीम के साथ रामगंगा नहर में गिरी स्कूली बस की जांच करने पहुंचे। खुलासा हुआ तो बस जुगाड़ वाहन निकला, जो खुद से तैयार कराया गया था। बस की लम्बाई-चौडाई भी मानकों से हटकर थी। बस का रजिस्ट्रेशन नहीं है। वाहन पर दिल्ली का फर्जी नम्बर प्रयोग किया जा रहा था।

गौरतलब है कि स्योहारा थाना क्षेत्र के ग्राम सदाफल में एनएस इंटरनेशनल स्कूल की बस रामगंगा नहर में गिर गई थी। बुधवार को छुट्टी के बाद घर जाते समय हुए इस हादसे में एक बच्चे की मौत हो गई थी और कई मासूम बच्चे घायल हो गए थे। पुलिस प्रशासन को रोड पर जाम लगाए ग्रामीणों को समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसी क्रम में शुक्रवार को एआरटीओ गौरीशंकर ने अपनी टीम के साथ थाने पहुंचकर स्कूली बस की जांच की। इस दौरान खुलासा हुआ कि बस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। एआरटीओ ने बयाया कि दिल्ली का फर्जी नम्बर बस पर प्रयोग किया जा रहा था। स्कूली बस जुगाड़ वाहन है, जो खुद से तैयार कराया गया था। बस की लम्बाई-चौडाई भी मानकों से हटकर थी। जांच टीम में एआरटीओ गौरीशंकर के साथ आरआई सुरेंद्र सिंह मौजूद थे।
डीएम के निर्देश भी ताक पर रख कर काम करने के आदी हुए अधिकारी
डीएम उमेश मिश्रा ने पिछले दिनों निर्देश दिए थे कि विद्यालयों के वाहनों की फिटनेस जांच कराने के साथ स्कूलों में बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों के विषय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएं। शत प्रतिशत स्कूली बसों के फिटनेस की जांच पूर्ण कराने के सख्त निर्देश देते हुए ये भी कहा था कि किसी भी दशा में अनफिट स्कूली वाहनों का संचालन न हो। उन्होंने संबंधित अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आगामी बैठक में कराए गए कार्यों की रिपोर्ट फोटो के साथ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसी के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक को जनपद के सभी स्कूलों के मैनेजर व प्रिंसिपल के साथ सड़क सुरक्षा की बैठक कर सभी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के भी सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आज का हादसा स्पष्ट संकेत देता है कि बिजनौर के अधिकारी अपने बॉस जिलाधिकारी के निर्देश भी ताक पर रख कर काम करने के आदी हो चुके हैं।
अभिभावकों की लापरवाही या मजबूरी!
कुल मिलाकर यह बात साफ हो गई है कि विभागीय हीलाहवाली और स्कूल प्रबंधन की धनलिप्सा के चलते इस वाहन में मासूम बच्चे ढोए जा रहे थे। कुछ लोग इसमें अभिभावकों की गलती और लापरवाही भी मानते हैं तो कई ऐसे भी हैं, जिनका मानना है… स्कूल प्रबंधन से अभिभावक लड़ नहीं सकते। उन्हें अपने बच्चों को स्टाफ द्वारा उत्पीड़ित किए जाने का डर सताता रहता है।
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