मुस्लिम आबादी में हुआ 1.2 प्रतिशत का इजाफा
जातीय जनगणना की रिपोर्ट, 2146 लोगों ने नहीं बताया अपना कोई धर्म
आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकती है जातिगत जनगणना की रिपोर्ट
बिहार में 1.2 प्रतिशत घटकर 81.99 प्रतिशत रह गई हिन्दू आबादी

नई दिल्ली (एजेंसियां)। बिहार, जातिगत जनगणना कराने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। बिहार में जब भारतीय जनता पार्टी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी सरकार में थी, तभी बिहार विधानसभा और विधान परिषद ने राज्य में जाति आधारित गणना कराए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। कोरोना की स्थिति संभालने के बाद 1 जून 2022 को सर्वदलीय बैठक में जाति आधारित गणना को सर्वसम्मति से करने का प्रस्ताव पारित किया गया। नीतीश कुमार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट “जाति आधारित जनगणना” की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि बिहार में 81.99 प्रतिशत यानी लगभग 82% हिंदू हैं। इस्लाम धर्म के मानने वालों की संख्या 17.7% है। शेष ईसाई सिख बौद्ध जैन या अन्य धर्म मानने वालों की संख्या 1% से भी कम है। राज्य के 2146 लोगों ने अपना कोई धर्म नहीं बताया।
जातीय जनगणना की रिपोर्ट जारी, राज्य में 63% ओबीसी

बिहार में सामान्य वर्ग के लोगों की आबादी 15 प्रतिशत है। बिहार की नीतीश कुमार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट “जाति आधारित जनगणना” की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार बिहार में सामान्य वर्ग के लोगों की आबादी 15 प्रतिशत है। पिछड़ा वर्ग की आबादी 27 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी करीब 20 फीसदी है। बिहार सरकार के प्रभारी मुख्य सचिव विवेक सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस कुल 214 जातियों के आंकड़े जारी किए हैं। इनमें कुछ ऐसी जातियां भी हैं, जिनकी कुल आबादी सौ से भी कम है। रिपोर्ट में 214 जातियों के अलावा 215वें नंबर पर अन्य जातियों का भी जिक्र किया गया है। आंकड़ों की मानें, राज्य की आबादी 13,07,25,310 है। वहीं कुल सर्वेक्षित परिवारों की संख्या 2,83,44,107 है। इसमें पुरुषों की कुल संख्या 4 करोड़ 41 लाख और महिलाओं की संख्या 6 करोड़ 11 लाख है। राज्य में प्रति 1000 पुरुषों में 953 महिलाएं हैं।

किस जाति की कितनी आबादी~
यादव – 14.26%
रविदास- 5.25%
दुसाध-5.31%
कोइरी- 4.21%
ब्राह्मण- 3.67%
राजपूत- 3.45%
मुसहर- 3.08%
भूमिहार- 2.89%
कुरमी- 2.87%
तेली- 2.81%
बनिया-2.31%
कानू-2.21%
चंद्रवंशी-1.64%
कुम्हार-1.40%
सोनार-0.68%
कायस्थ – 0.60%
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि हिंदी पट्टी के राज्यों में जहां जाति की राजनीति एक प्रमुख भूमिका निभाती है, वहां आगामी चुनावों में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट बड़ा मुद्दा बन सकती है।
जातीय जनगणना रिपोर्ट को मंडल रिपोर्ट 2.0 भी कहा जा रहा है। देश में पिछड़ी जातियों के आरक्षण के लिए 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू की गई थीं। अब 33 साल बाद जातीय जनगणना से जुड़ी रिपोर्ट के आने के बाद सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
खास बात यह भी है कि बिहार की कुल आबादी में हिंदुओं की भागीदारी 2001 की जनगणना के अनुसार 83.2 प्रतिशत से घटकर 1.2 प्रतिशत, यानि 81.99 प्रतिशत रह गई है। दूसरी तरफ 2001 में 16.5 प्रतिशत मुस्लिम आबादी अब 1.2 प्रतिशत बढ़कर 17.70 प्रतिशत हो गई है। वहीं अप्रत्याशित तौर पर बौद्ध धर्मावलंबियों की संख्या लगभग पांच गुना बढ़ गई है।
Leave a comment