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किरतपुर क्षेत्र में बुखार से लोगों का बुरा हाल, स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुविधाओं का टोटा

महाभारत बना बुखार, दुर्याेधन की भूमिका निभा रहा स्वास्थ्य विभाग

~रोहित चौधरी, सांध्य दैनिक प्रयाण

बिजनौर। जनपद में बुखार ने इस समय महाभारत का रूप ले लिया है। प्रतिदिन बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में बुखार रूपी महाभारत के बढ़ते कदमों को नहीं रोका गया तो यह विकराल रूप धारण कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग दुर्याेधन की भूमिका के रूप में दिखाई दे रहा है, जो अपने ही योद्धाओं की गर्दन काट रहा है। ताबड़तोड़ छापेमारी कर रहा है, जबकि यह समय छापेमारी का नहीं, बल्कि बुखार से निपटने का है। किरतपुर क्षेत्र का शायद ही कोई गांव ऐसा हो जहां पर बुखार के मरीज न हों। ऐसे में झोलाछाप चिकित्सक कहे जाने वाले इस महाभारत में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे हैं।

पिछले एक माह से जनपद में बुखार, वायरल, डेंगू, टायफाइड ने लोगों का बुरा हाल कर रखा है। कई गांव ऐसे हैं, जहां पर आधी से अधिक आबादी बुखार से कराह रही है। अब तक बुखार से कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इस समय किरतपुर क्षेत्र का बुरा हाल है। कई गांव बुखार से आग उगल रहे हैं। किरतपुर क्षेत्र के गांव गाजीपुर, बढ़ापुर, सीकरी, कुम्हेड़ा, गनौरा, जलालपुर सुल्तान, नंदपुर, गोपालपुर, हकीकतपुर, हरदासपुर, शादीपुर, बेगावाला, बरूकी, पीपलसाना, नंदपुर चांडक तुर्क, छितावर, इस्लामपुर, स्वाहेड़ी सहित कई दर्जन गांवों का बुरा हाल है। हालत यह है कि मरीजों को उपचार के लिए चिकित्सक तक नहीं मिल पा रहे हैं। प्राइवेट चिकित्सकों के पास मरीजों की भरमार है। ड्रिप लगाने के लिए भी चिकित्सकों के पास जगह हाथ नहीं आ रही है। स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। स्वास्थ्य केन्द्रों में उचित उपचार न होने के कारण मरीज प्राइवेट चिकित्सकों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग अपनी ही डींगें हाक रहा है।

…तो क्या घर से बीपी चैक करके अस्पताल जाएं मरीज ?

वाक्या उस समय का है कि जब एक महिला मरीज गनौरा पीएचसी में उपचार के लिए जाती है। वह अंदर प्रवेश करती है। सामने कुर्सी पर कलम और पर्ची हाथ में लिए बैठे व्यक्ति को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपती है। रिपोर्ट देखने के बाद कुर्सी पर बैठा व्यक्ति महिला मरीज से उनका बीपी (ब्लड प्रेशर) कितना है, पूछता है। इस पर महिला मरीज कहती है कि चिकित्सक आप हो, आप चैक करो। इस पर सामने बैठा व्यक्ति बोलता है कि बीपी नापने की मशीन हमारे पास नहीं है। सरकार ने हमें नहीं दे रखी है। अब इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएचसी में मरीजों का कैसा और कितने अच्छे से उपचार हो रहा होगा? उपचार के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ मरीजों के साथ कितना अच्छा बर्ताव करता है, यह भी सभी को पता है। इस संबंध में जब किरतपुर सीएचसी प्रभारी ईश्वरानंद ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि पीएचसी पर बीपी ही नहीं शुगर तक की मशीनें उपलब्ध है। जब उन्हें बताया कि गनौरा पीएचसी पर मरीजों को बीपी मशीन न होने की बात कही जा रही है तो उन्होंने कल बात करने की बात कहते हुए फोन काट दिया।

भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे झोलाछाप चिकित्सक

बुखार रूपी इस महाभारत में ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप चिकित्सक भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे हैं। जो महाभारत के इस युद्ध को समाप्त तो नहीं कर सकते, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। यदि ऐसे में झोलाछाप चिकित्सक अपने कर्तव्य से मुंह मोड़ लें तो स्वास्थ्य विभाग लाख कोशिशों के बावजूद भी इस युद्ध में अपनी जीत दर्ज नहीं करा सकता। छोटे से चिकित्सक के पास बोतलें लगवाने के लिए भी जगह हाथ तक नहीं आ रही है। कई गांवों में तो यह आलम है कि भीष्म की भूमिका निभाने वाले इन चिकित्सकों के पास क्लीनिक के बाहर सड़क तक पर भी मरीजों की कतार लगी हुई है। ऐसे में ये चिकित्सक पूरी ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। उधर आपदा में अवसर की तलाश करते हुए स्वास्थ्य विभाग इन क्लीनिकों पर छापेमारी करने में लगा हुआ है। हालांकि छापेमारी के बाद अधिकांश मामलों में विभाग की ओर से कार्यवाही तो नहीं होती लेकिन कार्यवाही न करने का कारण क्या होता है, यह भी सभी को पता है। अब अगर झोलाछाप चिकित्सक की जेब पर अनावश्यक खर्च का बोझ बढ़ेगा तो वह भी मरीज से ही पूरा करेगा। ऐसे में अगर यह कहा जाए कि बुखार को रोकने के लिए चिकित्सा कार्य पर ध्यान देने की जगह स्वास्थ्य विभाग छापेमारी कर मरीजों की जेब का भार बढ़ा रहा है तो गलत होगा अथवा सरल शब्दों में कहा जाए तो स्वास्थ्य विभाग इस महाभारत के युद्ध में अपने सैनिकों के ही हाथ काट रहा है।

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