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अब अफसरों के पीछे नहीं बैठेंगे माननीय

जनप्रतिनिधियों का करना होगा सम्मान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के सम्मान में शासनादेश जारी किया है। सरकारी कार्यक्रमों, बैठकों में जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों के ‘बैठने का क्रम, शिलापट्टों में नाम अंकित कराने और उपस्थिति प्रोटोकाल’ के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने पत्र जारी कर अफसरों को आदेश पालन करने के आदेश दिए हैं।

मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश दुर्गा शंकर मिश्रा ने समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर निर्देश जारी किए हैं।
श्री मिश्रा के लिखे पत्र में कहा गया है कि बैठकों, कार्यक्रमों और आयोजनों में जनप्रतिनिधियों को भी बुलाना होगा। कार्यक्रमों में अग्रिम पंक्ति में बैठे जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक और एमएलसी को सम्मान देना होगा। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित कर जानकारी देनी होगी। विकास निधि से काम करने पर निधि से भुगतान करना होगा। कार्यक्रमों के विज्ञापन में जनप्रतिनिधियों और योजनाओं के उद्घाटन में शिलापट्ट पर जनप्रतिनिधियों का भी नाम डालना होगा।


प्रदेश में माननीयों और अफसरों को सरकारी कार्यक्रमों में सम्मान देने के लिए मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने शुक्रवार आदेश जारी किया। पत्र में मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश मुख्यालय, जिला स्तर पर अयोजित बैठकों और आयोजनों में सांसद एवं विधान मण्डल के सदस्यों के बैठने के स्थान, सरकारी कार्यकमों में उन्हें आमंत्रित करने के लिए विज्ञापनों और शिलापट्टों पर उनका नाम अंकित कराना जरूरी है। इसको लेकर अध्यक्ष विधान सभा, सभापति, विधान परिषद एवं संसदीय कार्य मंत्री की 14 सितंबर को एक बैठक हुई थी। बैठक में जनप्रतिनिधियों को अनुमन्य प्रोटोकॉल तथा अन्य पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेकर आदेश जारी किए गए हैं।

माननीयों के सम्मान में शासन ने जारी किया आदेश

पत्र में बताया कि एक विधायक का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र होता है। लेकिन विधान परिषद के सदस्य के निर्वाचन क्षेत्र विस्तार में एक जिले के साथ दूसरा जिला भी शामिल होता है। क्षेत्र में विकास निधि से अपने पूरे निर्वाचन क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले जनपदों में कार्य करा सकते हैं। इसलिए उनके नाम के आगे अंकित जनपद से ही उनकी सारी व्यवस्था निर्धारित की जाती है। साथ ही पत्र में बताया कि किसी भी जिले की बैठक या कार्यकम में विधान परिषद के ऐसे सदस्य ही आमंत्रित किए जायेंगे, जिनका नाम जिले से जुड़ा हो या आवंटन के साथ अपनी विकास निधि से क्षेत्र में कार्य कराया हो। इसके साथ ही जो कार्य मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ा हो उसको जिले के संबंधित कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाएगा।

कार्यक्रमों में सहयोग के लिए बाएं ओर बैठें अफसर

समीक्षा बैठकों और आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि या कार्यक्रम के अध्यक्ष से दाहिनी ओर जिले के सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य के क्रम में बैठने की व्यवस्था की जायेगी। इसके साथ ही समीक्षा बैठक या कार्यक्रमों में सांसद के सहयोग के लिए डीएम या अपेक्षित अधिकारी उनके बाएं ओर बैठेंगे।

अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे सांसद, विधायक

मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री के जिलों में आयोजित कार्यक्रम को लेकर उनके मंच की पहली पंक्ति में सांसद, विधानमंडल के सदस्य, (विधायक) बैठेंगे। सीएम के आयोजनों में यदि जनप्रतिनिधियों की संख्या अधिक होती है तो उन्हें दूसरी, तीसरी पंक्ति में बैठाया जा सकता है। केवल मुख्य सचिव या जिस विभाग का कार्यकम आयोजित किया गया हो, उसके विभाग प्रमुख, यानि अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव ही मंच की अग्रिम पंक्ति में बैठ सकते हैं।

‘माननीय’ नहीं बैठेंगे अफसरों के पीछे

कार्यक्रमों के मंचों पर अधिकारियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी जनप्रतिनिधि (माननीय) किसी अधिकारी के पीछे नहीं बैठेंगे। मुख्यमंत्री के प्रदेश मुख्यालय ओर जिला स्तरीय कार्यक्रमों में केवल उपस्थित होने की सहमति देने वाले जिले के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य के ही नाम शिलापट्ट या विज्ञापन में लिखे जायेंगे। जो कि जिले से ही संबंधित होंगे। विधान परिषद के ऐसे सदस्य, जिन्होंने नाम के आगे आवंटित जिले के अलावा अपने क्षेत्र विकास निधि से निर्वाचन क्षेत्र के दूसरे जिले में कार्य कराया है, तो ऐसे मामलों में उस कार्य के मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में सम्मिलित होने पर, यदि वे अपनी उपस्थिति की सहमति देते हैं, तो उनके बैठने और शिलापट्ट, विज्ञापन में नाम दिये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी।

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