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गठबंधन पर नए सिरे से मुहर के बावजूद अभी नहीं बनी अंतिम सहमति

रालोद के सिंबल पर सपा के उम्मीदवार को लेकर अटकी बात!

लखनऊ (एजेंसी)। लोकसभा चुनाव के लिए सपा- रालोद गठबंधन पर नए सिरे से मुहर लगने के बावजूद मुजफ्फरनगर पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। रालोद के सिंबल पर सपा के उम्मीदवार को लेकर बात अटक गई है। कैराना, बागपत और मथुरा रालोद के हिस्से में जा रही हैं।

बताया गया है कि कैराना में रालोद के सिंबल पर सपा प्रत्याशी को मैदान में उतारा जाएगा। एक दिन पहले सपा-रालोद गठबंधन की शुरूआती सहमति में रालोद को सात सीटें दी गई, लेकिन सपा दो से तीन सीट पर अपने प्रत्याशी उतारना चाहती है। ऐसा हुआ तो रालोद के हिस्से में चार या पांच सीट ही रह जाएगी। मथुरा, बागपत और कैराना पर रालोद का सिंबल रहेगा, लेकिन मुजफ्फरनगर पर मामला उलझा हुआ है। रालोद नेतृत्व ने फिलहाल नल के सिंबल पर सपा के उम्मीदवार को इन्कार कर दिया है। यह भी संभव है कि मुजफ्फरनगर सीट पर सपा अपने ही सिंबल पर प्रत्याशी उतारे और बिजनौर सीट रालोद के हिस्से में चली जाए। इसी वजह से अंतिम फैसला नहीं हो सका। बागपत और मथुरा में रालोद के प्रत्याशी ही मैदान में उतरेंगे।

जयंत सिंह या चारू चौधरी ?

रालोद के रणनीतिकार पार्टी अध्यक्ष जयंत सिंह के लिए बागपत से बेहतर विकल्प मुजफ्फरनगर को बता रहे हैं। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जयंत सिंह चुनाव लड़ेंगे या नहीं? उनकी पत्नी चारू चौधरी को भी प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है। प्रत्याशी का समीकरण चुनाव नजदीक आने के बाद ही स्पष्ट होगा। अगर गठबंधन दलों के अध्यक्षों ने चुनाव लड़ा तो जयंत सिंह के मैदान में उतरने की संभावना है।

मुजफ्फरनगर और शामली

आसन्न लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य हरेंद्र मलिक टिकट की दावेदारी कर रहे थे। रालोद के खाते में सीट जाने पर प्रत्याशी को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि पूर्व मंत्री योगराज सिंह के पिता चौधरी जगबीर सिंह की हत्या के मुकदमे में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत आरोपित थे। गत वर्ष जुलाई महीने में अदालत से चौधरी नरेश टिकैत बरी हो गए। वहीं हाल ही में पूर्व मंत्री योगराज सिंह और टिकैत परिवार के बीच समझौता हुआ था। समझौता होने के दौरान योगराज सिंह ने कहा था कि जयन्त चौधरी के निर्देश और समाज की बात को मानते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। इसी को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि योगराज सिंह लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इनके अलावा शामली से रालोद विधायक प्रसन्न चौधरी के नाम पर राजनैतिक जानकारों में चर्चा है।

नगीना आसपा के हिस्से में !

दोनों दलों के बीच हुई बातचीत के बाद यह भी चर्चा है कि आसपा अध्यक्ष चंद्रशेखर सुरक्षित सीट नगीना से चुनाव लड़ेंगे। संभवत: यही वजह है कि सपा और रालोद ने अपनी बातचीत में नगीना सीट को शामिल नहीं किया। वहीं बिजनौर लोकसभा सीट पर भी पेंच फंस गया है। यहां पर दोनों दलों ने अपना दावा ठोका है। मुजफ्फरनगर सीट सपा को मिली तो बिजनौर सीट रालोद के हिस्से में चली जाएगी। अभी इन सीटों पर फैसला नहीं हुआ है। बिजनौर सीट पर नीरज चौधरी व चंदन चौहान रालोद से, रूचि वीरा सपा से और इमरान मसूद कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं।

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