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राम मंदिर को लेकर पार्टी नेताओं पर साध रहे थे निशान

06 साल के निष्कासन पत्र ने आसान कर दी भाजपा के साथ जाने की राह

आचार्य प्रमोद कृष्णम v/s कांग्रेस: टूटा 39 साल का नाता

नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को पार्टी की विपरीत गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में अगले 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसी के साथ जहां कांग्रेस से उनका 39 साल का नाता टूटा, वहीं बीजेपी में जाने का रास्ता भी खुल गया है। वहीं कांग्रेस से निष्कासित किए जाने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि राम और “राष्ट्र” पर “समझौता” नहीं किया जा सकता। शनिवार को कांग्रेस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पूर्व कांग्रेस नेता अपने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने पोस्ट को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को टैग किया है।

वरिष्ठ नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम और कांग्रेस का 39 साल पुराना साथ नाता टूट गया है। वहीं कई महीने से कांग्रेस छोड़ने की अटकलों पर भी शनिवार को विराम लगने के साथ ही उनकी भाजपा के साथ राजनीतिक पारी की नई शुरूआत करने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अभी तक इस मुद्दे पर स्पष्ट कुछ नहीं कहा है।

प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रमोद कृष्णम ने 1993 में कांग्रेस से संभल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भी किया था लेकिन वापस लेना पड़ा। फिर कौसर खां को टिकट दिया गया और आचार्य प्रमोद कृष्णम ने चुनाव लड़ाया। हालांकि कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी सत्यप्रकाश गुप्ता विजयी हुए थे। इसके अलावा वर्ष 2014 में संभल लोकसभा और वर्ष 2019 में लखनऊ से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। दरअसल आचार्य प्रमोद कृष्णम ने छात्र जीवन में 1985 के बाद से ही कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया था। उन्होंने यूथ कांग्रेस में भी जिम्मेदारी निभाई। वह पिछले कुछ समय से कांग्रेस की नीतियों का काफी विरोध कर रहे थे। इसे कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता माना है।

कल्कि धाम का महोत्सव में कांग्रेस से दूरी

बताया गया है कि वर्षों से ऐंचोड़ा कंबोह में श्री कल्कि धाम का महोत्सव आयोजित होता आया है। इसमें कांग्रेस के कई मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेता शामिल होते रहे हैं, लेकिन इस बार शिलान्यास कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र इन नेताओं को दिया गया या नहीं, ऐसी भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 फरवरी को शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। भाजपा के तमाम बड़े नेताओं को शिलान्यास का न्यौता देकर भी कांग्रेस से दूरी बनाने का संकेत आचार्य प्रमोद कृष्णम दे चुके थे।

आचार्य प्रमोद कृष्णम के निष्कासन का पत्र मिला है। वह छात्र जीवन से ही कांग्रेस के साथ जुड़े थे। पार्टी की ओर से कार्रवाई की गई है। इसमें मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। -विजय शर्मा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस संभल उत्तर प्रदेश

कांग्रेस नेताओं को बताते रहे हिंदू विरोधी

आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के नेताओं पर लगातार निशाना साध रहे थे। अयोध्या में श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण पत्र ठुकराने वाले नेताओं पर वह खूब भड़के। वह उनके बयानों से खफा थे और इसलिए ही उन्होंने कांग्रेस के कई नेताओं को हिंदू विरोधी भी बताया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में कुछ बड़े नेता ऐसे हैं, जिन्हें हिंदू शब्द से ही नफरत है। कुछ कांग्रेसी ऐसे नेता हैं, जिन्हें राम मंदिर से ही नहीं, बल्कि भगवान राम से भी नफरत है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बाद भी अपनी ही पार्टी का खुलकर विरोध शुरू किया तो कयास लगाए जाने लगे थे कि अब वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि शिलान्यास कार्यक्रम में ही उनके भाजपा में शामिल होने की घोषणा हो सकती है। कांग्रेस की कार्रवाई के बाद उनके लिए राह आसान हो गई है।

क्या लिखा है निष्कासन पत्र में ?

“अनुशासनहीनता की शिकायतों और पार्टी के खिलाफ बार-बार बयानबाज़ी को ध्यान में रखते हुए माननीय कांग्रेस अध्यक्ष ने श्री प्रमोद कृष्णम को तत्काल प्रभाव से छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने के उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।”

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