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जयंत चौधरी ने खत्म कर दिया बचा खुचा खेल

प्रेस विज्ञप्तियों के सहारे लड़ी जा रही लोकसभा चुनाव की जंग

भीड़ का मतलब कभी भी वोट नहीं होता

मोदी के मास्टर स्ट्रोक से बिलबिला उठे राजनैतिक दल

बिजनौर। लोकसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक दलों की सरगर्मियां अनवरत बढ़ती जा रही हैं। हरेक दल हर समाज को अपने पक्ष में करने की कवायद में जुटा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मास्टर स्ट्रोक ने अन्य राजनैतिक दलों के अरमानों पर वज्रपात कर दिया। किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से नवाज कर किसानों, खासतौर पर जाट समुदाय को एकतरफा अपने पक्ष में कर लिया है। उनके इस कदम से अन्य राजनैतिक दल ठगे से रह गए हैं।

भाजपा के अलावा अन्य राजनैतिक दलों में लगभग मातम की स्थिति हो गई है। क्या करें और क्या न करें की जद्दोजहद में फंसे राजनेता किंकर्तव्य विमूढ हो गए हैं। बचा खुचा खेल जयंत चौधरी ने खत्म कर दिया। किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो खेल खेला, जयंत चौधरी कह उठे कि उन्हें किस मुंह से मना करूं? दिल जीत लिया है मोदी जी ने।

Indi एलायंस में गठन के बाद से ही इससे जुड़े दलों के मुखियाओं की अतिमहत्वाकांक्षा हावी रही। यही कारण रहा कि एक मजबूत विपक्ष बनने की मनोकामना धराशाई हो गई। लोकतंत्र में सत्ताधारी दल के विपरित विरोधी दल की भूमिका हमेशा से ही सर्वोपरि रही है। सत्ताधारी दल खुद को सर्वेसर्वा न समझ कर लोकहित, जनहित के कार्य करे और उससे किसी को नुकसान न हो, यह देखने और करने की जिम्मेदारी विपक्ष में बैठे राजनैतिक दल की होती है। यदि वही पंगु हो जाए तो कुछ नहीं हो सकता। फिलहाल स्थिति यही हो चुकी है। विपक्ष भले ही सरकार के कामकाज, नीतियों पर उंगली उठा ले, लेकिन मजबूती से कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं है।

उधर कश्मकश इस कदर हावी है कि लोकसभा चुनाव की जंग प्रेस विज्ञप्तियों के सहारे लड़ी जा रही है। जाट समाज के हितैषी होने की दुहाई देकर चुनाव पूर्व रैलियां कर रहे अन्य छद्म नामी दल रोजाना गांव, नुक्कड़ों पर अपने समर्थन में भीड़ जुटाने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। यह बात वह खुद भी समझते हैं, लेकिन मतदाताओं को लुभाने, भरमाने की कवायद जारी है।

दरअसल भीड़ का मतलब कभी भी वोट नहीं होता। हर एक राजनैतिक दल की सभाओं में लोगों की भीड़ जुटती दिखाई देती है। स्टार नेताओं की सभाओं में तो भाड़े की भीड़ जुटाने की बात जग जाहिर है। ऐसा ही कुछ अन्य राजनैतिक दल भी अभी से कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में बहुजन समाज पार्टी एक किनारे खड़े होकर तमाशा देख रही है, ऐसा बहुत से लोगों का मानना है। … लेकिन ऐसा कुछ है नहीं। राजनीति के जानकारों का दावा है कि बीएसपी जितनी मजबूती से चुनाव लड़ेगी, उतना ही बड़ा फायदा प्रत्यक्ष (अप्रत्यक्ष नहीं) रूप से भाजपा को ही मिलने जा रहा है!

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