दलित मुस्लिम गठजोड़ पर हो रहा काम
13 मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर है पार्टी की नजर
मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर जातीय समीकरण साध रही बसपा

लखनऊ। लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी पिछली बार से अधिक सीटें जीतने का गणित बैठा रही है।बसपा ने पिछले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए कुल 10 सीटें जीती थीं। बसपा सुप्रीमो की नजर प्रदेश की उन मुस्लिम बाहुल्य 13 सीटों पर है, जहां पिछले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था।
13 मुस्लिम बाहुल्य सीट में से जीती थीं पांच
वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बसपा ने सपा से गठबंधन कर लड़ा था। पार्टी ने अपने हिस्से में आईं 38 सीट में से 10 पर जीत हासिल की थी। इनमें से मुस्लिम बाहुल्य 13 सीटों में पांच पर जीत दर्ज की। इनमें बिजनौर से मलूक नागर, अमरोहा से कुंवर दानिश अली, सहारनपुर से हाजी- फजलुर रहमान, नगीना से गिरीश चंद्र और श्रावस्ती से राम शिरोमणी जीते थे। मेरठ में बसपा के हाजी महमूद याकूब दूसरे नंबर पर रहे थे। अन्य सीटों पर सपा व उसके कोटे पर रालोद उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।

एससी व मुस्लिम गठजोड़ का समीकरण
इस बार बसपा जातीय समीकरण को आधार बनाकर मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर मुस्लिम या दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारने की योजना पर काम कर रही है। इसी आधार पर को~आर्डिनेटरों से उम्मीदवारों का पैनल भी मांगा गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती का मानना है कि दलित और मुस्लिमों को साथ आने में किसी तरह का कोई गुरेज नहीं होगा। इसलिए दोनों साथ आ गए तो इस बार पिछली की अपेक्षा अधिक सीटों पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
दलबदल देखते हुए चेहरे बदलना भी मजबूरी
बसपा के कई सांसद या पिछली बार के प्रत्याशी दूसरी पार्टियों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इसलिए पार्टी लोकसभा की अधिकतर सीटों पर उम्मीदवार बदलने का प्रयोग करेगी! यही कारण होगा कि अधिकतर सीटों पर नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
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