पहले चरण में 19 अप्रैल को हुआ था मतदान
मुरादाबाद लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी कुं. सर्वेश सिंह का निधन
नई दिल्ली (एजेंसी)। मुरादाबाद लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी कुंवर सर्वेश कुमार सिंह उर्फ राकेश सिंह का निधन हो गया है। गंभीर बीमारी के चलते उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। एक दिन पहले ही संसदीय सीट के लिए मुरादाबाद में मतदान हुआ था।

भारतीय जनता पार्टी के मुरादाबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने शनिवार शाम 06:30 बजे दिल्ली AIIMS में अंतिम सांस ली, वे 71 वर्ष के थे। टिकट मिलने के समय भी कुंवर सर्वेश अस्पताल में भर्ती थे। इस सीट पर 19 अप्रैल शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान हुआ था। पीएम मोदी ने उनके निधन पर दु:ख जताते हुए कहा, “उनका जाना पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
मुरादाबाद में करीब 60 फीसदी मतदान हुआ था। इस सीट पर वर्ष 2019 में 65.39 फीसदी वोटिंग हुई थी। पेशे से बिजनेसमैन कुंवर सर्वेश कुमार की गिनती उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेताओं में थी। वर्ष 2014 में सर्वेश सिंह मुरादाबाद से सांसद बने थे। इससे पहले वह ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से 4 बार विधायक चुने गए थे। सर्वेश सिंह के बेटे सुशांत सिंह बिजनौर की बढ़ापुर सीट से भाजपा से विधायक हैं।
मुंह में कुछ तकलीफ के चलते कुछ दिन पहले सर्वेश सिंह की दिल्ली में सर्जरी हुई थी। वह अमित शाह की रैली में मंच पर दिखे थे। 19 अप्रैल को मतदान के बाद फिर से तबीयत असहज लगने पर वह शुक्रवार को देर रात दिल्ली के एम्स में डॉक्टर को दिखाने पहुंचे थे। पूर्व सांसद के भतीजे व प्रतिनिधि अमित सिंह ने बताया कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। देर रात तक उनका शव पैतृक गांव लाया जाएगा। उनके निधन की जानकारी मिलते ही सियासी और सामाजिक हलके में शोक की लहर दौड़ गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “मुरादाबाद लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह जी के असामयिक निधन से अत्यंत दु:ख हुआ है। वे अपने आखिरी पल तक जनसेवा और समाजसेवा के प्रति समर्पित रहे। उनका जाना पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके परिजनों को इस गहरे शोक को सहने की शक्ति प्रदान करे।”
मुरादाबाद सीट से 2014 में बने थे सांसद
कुंवर सर्वेश सिंह 2014 में मुरादाबाद सीट से सांसद चुने गए थे। इससे पहले 2009 में वह पहली बार इस सीट से सांसद का चुनाव लड़े पर कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अजहरुद्दीन से हार गए थे। वर्ष 2019 में भी भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया पर सपा बसपा के गठबंधन में वह सपा प्रत्याशी डा. एसटी हसन से चुनाव हार गए। इस बार भी पहले उनका टिकट होल्ड पर रहा, बाद में पार्टी ने उन्हें ही प्रत्याशी घोषित कर दिया। सर्वेश सिंह सांसद बनने से पूर्व ठाकुरद्वारा विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं। उनके पिता रामपाल सिंह भी इसी सीट से चार बार विधायक और एक बार अमरोहा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं।
कार्यकर्ताओं के लिए अफसरों से भिड़ जाते थे सर्वेश
अपनी दबंग छवि के लिए जाने वाले सर्वेश सिंह की अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ रही। उनके विधायक और सांसद रहते कार्यकर्ताओं के लिए अफसरों से भिड़ने के कई किस्से हैं। वर्ष 2007 का चुनाव बसपा से हारने के बाद सपा के शासन काल में 2012 में ठाकुरद्वारा से विधायक बने। इस बीच 2014 का लोकसभा चुनाव लड़े और जीते। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके अच्छे संबंध रहे।
काउंटिंग पर पड़ेगा असर ?
नियमों के अनुसार वोटिंग से पहले किसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी के निधन पर चुनाव कैंसिल हो जाता है। इस सीट पर वोटिंग हो चुकी है, इसलिए काउंटिंग पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। मतगणना के बाद अगर सर्वेश सिंह जीतते हैं तो यह सीट रिक्त घोषित हो जाएगी और दोबारा चुनाव की प्रक्रिया होगी। इस सीट पर सपा से रुचि वीरा और बसपा से इरफान सैफी चुनाव मैदान में हैं।
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