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आरोपी रेहड़ी-पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष

सीएम योगी का डीप फेक वीडियो बनाने का आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एआई जेनरेटेड डीप फेक वीडियो बनाने वाले एक युवक को गौतमबुद्ध नगर से एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया कि सीएम योगी का एआई से बनाया गया वीडियो वायरल होने की सूचना मिली थी। इस मामले में थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्ध नगर में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में यूपी एसटीएफ को जांच में पता चला कि श्याम गुप्ता सेक्टर 49 बरौला गौतमबुद्ध नगर, पूर्व निवासी लखीमपुर खीरी ने भ्रामक व आपत्तिजनक वीडियो बनाकर एक्स (X) प्लेटफार्म पर प्रसारित किया था। एसटीएफ ने श्याम गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। वहीं बताया जाता है कि आरोपी रेहड़ी-पटरी संचालक वेलफेयर एसोसिएशन का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष भी है।

बताया गया है कि 01 मई 2024 को सोशल मीडिया साइट पर सीएम योगी आदित्यनाथ का डीप फेक एआई जनरेटेड वीडियो शेयर किया गया था। इस वीडियो को सोशल मीडिया साइट एक्स पर @shyamguptarpswa नाम के प्रोफाइल से शेयर किया गया था। साथ ही इस वीडियो को शेयर करते हुए आरोपी ने भ्रामक तथ्य साझा किए और राष्ट्रविरोधी चीजों को भी शेयर किया।

गिरफ्तार आरोपी

साइबर क्राइम अधिकारियों ने जारी किए विशेष निर्देश

नोएडा साइबर क्राइम के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के डीप फेक वीडियो देश की अखंडता और सद्भावना को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने के निर्देश देते हुए सरकार ने इस तरह की घटनाओं पर नजर रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। अभी जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जल्द की जाएगी।।

अमिताभ यश, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था / एसटीएफ़ उत्तर प्रदेश
सोशल मीडिया पर मुख्यमन्त्री उ.प्र. का AI Generated डीप फेक वीडीयो वायरल किया जा रहा था। इस प्रकरण में यूपी एसटीएफ़ द्वारा नोएडा में अभियुक्त को गिरफ़्तार किया गया है। ~ अमिताभ यश, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था / एसटीएफ़ उत्तर प्रदेश

कैसे बनाते हैं डीपफेक वीडियो?

डीप फेक वीडियो एक नई तकनीक है, जिसमें मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इन वीडियो को बनाने के लिए किसी व्यक्ति की आवाज और बोलने के लहजे को कंप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से कैप्चर किया जाता है। फिर सॉफ्टवेयर की सहायता से एक नए वीडियो में इस व्यक्ति को बोलते हुए दिखाया जाता है, जबकि वास्तव में वह ऐसा कुछ नहीं कह रहा होता। इस प्रक्रिया में फेस स्वैपिंग और लिप सिंकिंग जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। फेस स्वैपिंग में किसी दूसरे व्यक्ति के चेहरे को मूल वीडियो में जोड़ा जाता है, जबकि लिप सिंकिंग में होंठों की गति को मूल आवाज के अनुसार संशोधित किया जाता है। इस तरह बना डीपफेक वीडियो असली लगता है और धोखाधड़ी का एक खतरनाक हथियार बन सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से डीपफेक की समस्या और बढ़ेगी। इसलिए जरूरी है कि इस पर नियंत्रण रखा जाए और जनता को इससे होने वाले खतरों के बारे में जागरूक किया जाए।

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