जिला कृषि अधिकारी के उर्वरक विक्रेताओं को कड़े निर्देश
उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की चेतावनी
उर्वरकों की टैगिंग, ओवर रेटिंग, कालाबाजारी व तस्करी रोकने को सख्ती
बिजनौर। वर्तमान में कृषकों द्वारा खरीफ सीजन 2024-25 में मुख्यतः धान की रोपाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिसके कारण फास्फेटिक उर्वरकों की मांग कृषकों में तेजी से बढ रही है। कृषकों को उनकी जोत/कृषित भूमि के आधार पर उर्वरक वितरण करने, उर्वरकों की शत प्रतिशत बिक्री पीओएस मशीन से कराने, उर्वरकों विशेषकर फास्फेटिक एवं यूरिया उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग रोकने, ओवर रेटिंग, कालाबाजारी तथा उर्वरकों की तस्करी रोकने के कड़े निर्देश दिये गये हैं।

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने विशेष जानकारी देते हुए बताया कि जनपद के प्रत्येक कृषक को जोत एवं उगाई जाने वाली फसल की निर्धारित संस्तुतियों के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराये जाने हैं। तत्क्रम निम्नांकित बिन्दुओं पर प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
निर्धारित मूल्य पर अनिवार्य रूप से वितरण करें सुनिश्चित
वर्तमान में प्रयोग होने वाले मुख्य फास्फेटिक उर्वरकों (डीएपी/एनपीके/यूरिया) की बिक्री कृषकों को निर्धारित मूल्य पर अनिवार्य रूप से वितरण करना सुनिश्चित करें, यदि किसी भी दशा में कोई उर्वरक विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य पर उर्वरक बिक्री करता पाया जायेगा, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी।
अन्य उर्वरक/उत्पादों की न की जाए टैंगिग
उर्वरक विक्रेताओं द्वारा फास्फेटिक उर्वरकों एवं यूरिया के साथ जबरन किसी भी प्रकार के अन्य उर्वरक/उत्पादों की टैंगिग न कि जाए, यदि किसी भी दशा में कोई उर्वरक विक्रेता अन्य उर्वरकों/उत्पादों की टैगिंग करके उर्वरक बिक्री करता पाया जायेगा, तो उसके विरुद्ध उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 मे निहित प्राविधानों के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी।
पीओएस मशीन के माध्यम से हो उर्वरकों की बिक्री
उर्वरक विनिर्माता/प्रदायकर्ता संस्थाओं द्वारा किसी भी थोक उर्वरक विक्रेता को प्रमुख फास्फेटिक एवं यूरिया उर्वरक की आपूर्ति किये जाने पर कम प्रचलित उर्वरक/उत्पाद भी क्रय करने हेतु बाध्य किया जाता है, तो सम्बन्धित विनिर्माता/प्रदायकर्ता संस्थाओं के विरुद्ध उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 मे निहित प्राविधानों के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी। कृषकों को उर्वरक की बिक्री करते समय उनकी जोत-बही/खतौनी देखकर उसमें अंकित कृषि भूमि एवं उगाई जाने वाली फसल की निर्धारित संस्तुति के अनुसार पीओएस मशीन के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित की जाए।
समस्त रिकॉर्ड रखें अप टू डेट
उर्वरक विक्रेताओं द्वारा अपने विक्रय केन्द्रों पर उर्वरक बिक्री करते समय उर्वरकों का वितरण विक्रय रजिस्टर पर अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए, जिसमें क्रेता कृषक का नाम, पिता का नाम, ग्राम, विकासखण्ड, तहसील, मोबाइल नम्बर के साथ-साथ जोत-बही/खतौनी एवं बोई जाने वाली फसल का विवरण भी अनिवार्य रूप से पृथक पंजिका में अंकित किया जाए।
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने कहा कि प्रत्येक उर्वरक व्यवसायी के स्तर पर स्टाक पंजिका, विक्रय पंजिका तथा रसीद अनिवार्य रूप से रखी जाए या ऐसे प्रारूप में डिजिटल स्टाक रजिस्टर, जो तिथिवार स्टाक स्थिति, आरम्भिक अवशेष, दिन के दौरान प्राप्तियों, दिन के दौरान विक्रय और अंतिम स्टाक को स्पष्टतः प्रदर्शित करता हो, का होना आवश्यक है। थोक/फुटकर उर्वरक विक्रेता को उर्वरकवार बिक्री केंद्रों पर दर तथा स्टाक का अंकन रेट एवं स्टाक बोर्ड पर प्रतिदिन अंकित किया जाए।
Leave a comment