पुरुषोत्तम दास टंडन जी की जयंती पर विचार एवं काव्य गोष्ठी
साथ चली हो हिंदी भाषा बनकर छाया जैसे: राम सिंह सुमन
धामपुर (बिजनौर)। वर्षो की परंपरा अनुसार उत्तर प्रदेश युवा साहित्यकार संघ के तत्वाधान में महान स्वतंत्रता सेनानी हिंदी के प्रबल समर्थक पुरुषोत्तम दास टंडन जी की जयंती के अवसर पर एक विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

हरिकांत निवास पर आयोजित कार्यक्रम में कवि एवं शायरों ने अपनी रचनाओं से आयोजन को सफल बनाया। राम सिंह सुमन का कहना था; चलकर हिंदी पथ पर आया, जीवन भर में ऐसे। साथ चली हो हिंदी भाषा, बनकर छाया जैसे। डॉक्टर अनिल शर्मा अनिल ने कहा कि मौसम है यह सुहाना मनभावनी नजारे, हर मन को है लुभाती है सावन की बहार।नरेंद्र जीत अनाम ने कहा; मां तो घर की वृक्ष मूल थी और तना थे बाबू जी। राज कुमार वर्मा ने कहा; सावन में झूले पड़ते थे, घर घर मस्ती आवै थी, सांझ ढले जब महिलाएं मिल गीत झूलते गावे थीं। शायर वीरेंद्र बेताब का कलाम था; मेरे जख्म रिस रिस के ये कह रहे हैं, न भूलूंगा मैं दोस्ताना तुम्हारा। नरेश वर्मा ने कहा जब सावन की ऋतु आती है, तब हरियाली जश्न मनाती है।

इस अवसर पर विभूति कांत शर्मा, रजनीश शर्मा, इंदु कांत शर्मा, सुधाकर शर्मा, राजकुमार सिंह, केशव कांत शर्मा इत्यादि शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ राज कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। अध्यक्षता राम सिंह सुमन ने एवं संचालन हरिकांत शर्मा ने किया।
Leave a comment