अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सरस काव्य संध्या
छोटे बच्चे हमने देखे, मजदूरी कर समय बिताते, कोई बर्तन साफ कर रहा, कोई देखा जूठन खाते।।
बरेली। कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में स्थानीय इंदिरा नगर में सुकवि हरिकांत मिश्र ‘चातक’ के संयोजन में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सरस काव्य संध्या का आयोजन किया गया। अध्यक्षता साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की। मुख्य अतिथि विनय सागर जायसवाल एवं विशिष्ट अतिथि सुभाष रावत राहत बरेलवी रहे। संचालन राज शुक्ल गजल राज ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
गीतकार उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट ने अपना गीत इस प्रकार प्रस्तुत किया – कई चले अभियान यहाँ पर, हुई सर्व शिक्षा भी कैसी।। कागज पर चल रहे आँकड़े, नहीं रही वह ऐसी- वैसी।। छोटे बच्चे हमने देखे, मजदूरी कर समय बिताते, कोई बर्तन साफ कर रहा, कोई देखा जूठन खाते।।

संयोजक कवि हरिकांत मिश्र चातक ने अपनी व्यंग्य कविता इस प्रकार प्रस्तुत की – मेरी बीवी थी अनपढ़ और गंवार
मेरा दोस्त आया बोला, भाभी जी नमस्कार
वह बोली देवर जी यह कौन सी है कार
मेरी बीवी थी अनपढ़ और गंवार।

सरस काव्य संध्या में कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं के माध्यम से साक्षरता दर बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में संस्था के सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट, दीपक मुखर्जी दीप, श्रीकांत मिश्रा, पवन अंचल, विनीत सक्सेना, राम कुमार कोली, डॉ अखिलेश गुप्ता, राम प्रकाश सिंह ओज, अश्वनी कुमार तन्हा, डॉ. राजेश शर्मा ककरेली, उमेश अद्भुत, अभिषेक अग्निहोत्री, राज कुमार अग्रवाल, मनोज सक्सेना मनोज, रीतेश साहनी रमेश रंजन एवं मनोज कुमार आदि उपस्थित रहे।
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