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विश्व फ़िज़ियोथेरेपी दिवस पर विशेष

तनाव कम करने में भी मददगार है यह थेरेपी

जटिल शारीरिक समस्याओं का समाधान फ़िज़ियोथेरेपी: ऊषा बंसल

विश्व भौतिक चिकित्सा परिषद ने 1996 में 8 सितंबर को विश्व भौतिक चिकित्सा दिवस के रूप में घोषित किया। WCPT वर्तमान में विश्व फिजियोथेरेपी के रूप में जाना जाता है।

वर्ल्ड कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ फ़िज़ियोथेरेपी (WCPT) ने वर्ष 1996 में, 08 सितंबर को विश्व PT दिवस के रूप में घोषित किया (इसे अब वर्ल्ड फ़िज़ियोथेरेपी के नाम से जाना जाता है)। इसी दिन 1951 में विश्व फ़िज़ियोथेरेपी की स्थापना हुई थी। यह दिन वैश्विक फ़िज़ियोथेरेपी समुदाय की एकता और एकजुटता का प्रतीक है। हर साल, दुनिया 8 सितंबर को विश्व भौतिक चिकित्सा दिवस मनाती है।

श्रीमती ऊषा बंसल वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट

उक्त जानकारी देते हुए जिला बिजनौर की जानी मानी फिजियोथेरेपिस्ट ऊषा बंसल ने बताया कि यह दिन दुनिया भर के फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए एक मंच प्रदान करता है। इससे उनकी संबंधित भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। फिजियोलॉजी का उद्देश्य मरीजों की बीमारियां, बीमारी और स्वास्थ्य को बहाल करना, संरक्षित करना है। फिजियोथेरेपिस्ट आपको; आपके उपचार में शामिल करते हैं। फिजियोप्लास्टी यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि व्यक्तिगत सक्रियता और सुगमता बनी रहे। विश्व फिजियोथेरेपी सदस्य अपने वैज्ञानिकों को इस विशेषज्ञ को लोकप्रिय बनाने और उनकी क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। यह विश्व पीटी दिवस पर ध्यान केन्द्रित करके ऐसा बताता है।

जिला बिजनौर की वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट श्रीमती ऊषा बंसल ने बताया कि फिजियोथेरेपी सिर्फ दर्द ही नहीं बल्कि शारीरिक जटिलताओं को दूर करने के साथ ही तनाव कम करने में मददगार है। यह थेरेपी दवाओं की निर्भरता कम करने का भी काम करती है।

फिजियोथेरेपी कराने वालों की संख्या बढ़ी

इसे जागरूकता ही कहेंगे कि जिला बिजनौर में समय के साथ न सिर्फ फिजियोथेरेपी कराने वालों की तादाद बढ़ी, बल्कि फिजियोथेरेपिस्ट की संख्या भी बढ़ गई है। जिला मुख्यालय पर कुछ साल पहले तक जिला अस्पताल के अलावा तीन या चार ही निजी फिजियोथेरेपी सेंटर थे, लेकिन आज यह संख्या करीब 19 से अधिक पहुंच चुकी है। पहले तहसील स्तर पर निजी सेंटर नहीं थे, लेकिन आज पांचों तहसील पर इसके लिए निजी सेंटर खुल चुके हैं। जिला अस्पताल में यूं तो फिजियोथेरेपी की सुविधा करीब 12 साल से है, लेकिन पहले जानकारी के अभाव में इसका लाभ उठाने बहुत कम ही लोग पहुंचते थे। वर्ष 2014 से फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर तैनात मुकेश कुमार के अनुसार पहले दिन में दो या तीन मरीज ही आते थे, लेकिन अब संख्या काफी बढ़ गई है। एक व्यक्ति की फिजियोथेरेपी में करीब 40 मिनट लग जाते हैं। फिलहाल यहां रोजाना 25 से 30 मरीजों की  फिजियोथेरेपी हो रही है।

~ वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट ऊषा बंसल 075058 43705

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