छापे में कई खुलासे, बम्लेश्वरी माता के मंदिर में सप्लाई होते हैं पैकेट !
मजहर खान के मुर्गी फॉर्म में बन रहा था बम्लेश्वरी माता के मंदिर का ‘श्री भोग प्रसाद’
खाद्य विभाग की टीम ने एक पोल्ट्री फॉर्म में छापा मार कर बड़ा खुलासा किया है। छापेमारी के दौरान पोल्ट्री फॉर्म में बम्लेश्वरी देवी मंदिर परिसर में संचालित दुकानों के लिए सप्लाई किए जाने वाले श्री भोग प्रसाद के पैकेट मिले हैं।

राजनांदगांव। नवरात्रि से पहले छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आस्था से खिलवाड़ का नया कुचक्र सामने आया है। खाद्य विभाग की टीम ने एक पोल्ट्री फॉर्म में छापा मार कर श्रीप्रसाद के पैकेट बरामद किए हैं। यह प्रसाद डोगरगढ़ स्थिति प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी देवी के परिसर में लगी दुकानों में सप्लाई किया जाता है। खाद्य सुरक्षा टीम ने डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र स्थित राका गांव के एवन ट्रेडर्स में छापामारी की। इस दौरान यहां प्रसाद का निर्माण भी पाया गया। हाल ही में आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर को लेकर भी विवाद सामने आया था।
खाद्य विभाग की टीम जब गुरुवार को पोल्ट्री फॉर्म पहुंची तो मां बम्लेश्वरी मंदिर में बंटने वाले प्रसाद के बड़े पैमाने में पैकेट मिले। इसके साथ ही मुर्गी पालन पोल्ट्री फॉर्म संचालक द्वारा भोग प्रसाद इलायची दाना बनाया जा रहा था। जांच के दौरान पता चला कि करीब 5000 स्क्वायर फीट के कैंपस में पोल्ट्री फॉर्म के साथ ही प्रसाद बनाने की फैक्ट्री संचालित होती है। इसे ‘श्री भोग प्रसाद’ के नाम से बनाया जा रहा था। यह प्रसाद मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन करने वाले भक्त खरीदते हैं इसकी सप्लाई मंदिर के पास दुकानों में होती है।
ज्ञात हो कि मंदिर का संचालन सरकारी नियंत्रण के तहत एक पब्लिक ट्रस्ट करता है,जिसका चुनाव प्रत्येक 3 वर्ष में संपन्न होता है। वर्तमान में ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल हैं।

जहां बन रहा था प्रसाद उस पोल्ट्री फॉर्म का संचालक है मजहर खान
बताया जा रहा है कि मुर्गी फार्म का संचालक मजहर खान है। जिस पैकेट में ये इलायची दाना बेचा जा रहा था उसमें लिखा है इसे ‘साफ एवं पवित्र वातावरण में निर्मित’ किया गया है। जहां प्रसाद बनाया जा रहा है वहां मुर्गी पालन, अंडे निकालना और मुर्गियों को मांस -के लिए बेचने का भी काम होता है। खाद्य विभाग की टीम ने इलायची दाना के सैंपल लिए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में खाद्य विभाग के अधिकारियों को इलायची दाना निर्माण से जुड़ी कोई भी अनुमति के दस्तावेज नहीं मिले हैं।
वहीं, फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों का दावा है कि पोल्ट्री फार्म उसी परिसर में है, लेकिन वहां काम करने वाले मजदूर अलग हैं। डोंगरगढ़ के जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डोमेन धुर्वे ने इसकी पुष्टि की है कि पोल्ट्री फार्म में इलायची दाना बनाया जा रहा था और बड़ी मात्रा में प्रसाद के पैकेट बरामद हुए हैं। उन्होंने बताया कि संचालित फैक्ट्री का पंजीयन नहीं है। साथ ही पैकेजिंग में बड़ी गड़बड़ी दिखी है। इसमें मानक, तिथि, बैच नंबर भी अंकित नहीं है।

छत्तीसग़ढ सरकार ने जारी किया है अलर्ट
आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलावटी प्रसाद मिलने के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार अलर्ट मोड पर है। प्रदेश सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें देवभोग के घी का ही उपयोग प्रसाद बनाने में किया जाना अनिवार्य किया गया है।
किसी संस्था का प्रसाद नहीं चढ़ता: मनोज अग्रवाल

बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति डोंगरगढ़ के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के अनुसार – मां बम्लेश्वरी मंदिर में चढ़ने वाले प्रसाद का किसी प्रकार से कोई टेंडर नहीं दिया जाता है। यहां ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसी एक ही संस्था या फैक्ट्री का बना हुआ प्रसाद आएगा और वही चढ़ाया जायेगा। उन्होंने कहा की यहां भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नारियल को ही प्रसाद स्वरूप बांटा जाता है।
विवादित रहा है बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति का प्रबंधन
बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति डोंगरगढ़ के अध्यक्ष, मनोज अग्रवाल के घर पिछले दिनों छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग घोटाले की जाँच के दौरान ED का छापा भी पड़ा था। छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग घोटाला भूपेश बघेल सरकार के दौरान ली गयी डेढ़ सौ करोड़ की रिश्वत की जांच से सम्बंधित है। जांच के तहत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश भघेल के करीबी माने जाने वाले छतीसग़ढ राइस मिलर्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को पिछले साल ED ने गिरफ्तार किया था। मां बम्लेश्वरी देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल पर रोशन चंद्राकर से सम्बंधित होने के कारण ED द्वारा छापेमारी की गयी थी।
2000 हजार वर्ष पुराना है मां बम्लेश्वरी का मंदिर

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित मां बम्लेश्वरी का भव्य मंदिर है। राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। पहाड़ के नीचे छोटी बम्लेश्वरी माता का भी मंदिर है। वैसे तो साल भर यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन इस कामाख्या नगरी में नवरात्रि के दौरान अलग ही दृश्य होता है। डोंगरगढ़ में जमीन से करीब 2 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजती हैं मां बमलेश्वरी। मां की एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से भक्तों का जत्था माता के इस धाम में पहुंचता है। कोई रोप वे का सहारा लेकर तो कोई पैदल ही चलकर पहुंचता है। मां बम्लेश्वरी को उज्जैन के महाप्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी माना जाता है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी माँ बगुलामुखी हैं। यह कलचुरी कालीन मंदिर है। इसका निर्माण लगभग 2000 वर्ष पूर्व हुआ था।
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