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सावधान! अब पेंशनर्स को निशाना बना रहे हैं साइबर अपराधी

“साइबर अपराधियों का पेंशन धारकों को ठगने का नया तरीका”

आजकल साइबर अपराधियों द्वारा पेंशन धारकों को “जीवन प्रमाण पत्र” ऑनलाइन अपडेट करने के लिए कॉल किया जा रहा है, उनके पास पेंशन धारकों का पूरा डेटा जैसे नियुक्ति का दिनांक, सेवानिवृत्ति का दिनांक, पीपीओ नंबर (पेंशनभोगी भुगतान आदेश संख्या), आधार कार्ड संख्या, स्थाई पता, ईमेल आईडी, सेवानिवृत्ति पर प्राप्त राशि, मासिक पेंशन, नॉमिनी आदि की जानकारी होती है। वे उन्हें इस पूरे डेटा के साथ कॉल करते हैं, ताकि पेंशन धारक को यह विश्वास दिलाया जा सके कि वे पेंशन निदेशालय से हैं। वे पेंशन धारकों का पूरा डेटा बताते हुए उनका जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने हेतु ओटीपी साझा करने के लिए कहते हैं। एक बार जब पेंशन धारक फोन पर आए हुए ओटीपी को साझा कर देते हैं तो, जालसाजों को पेंशन धारक के बैंक खाते का डायरेक्ट एक्सेस कन्ट्रोल मिल जाता है। तत्पश्चात वे पेंशन धारक के खाते में जमा समस्त राशि को तुरन्त दुसरे ‘फर्जी बैंक खातों’ या ‘वॉलेट’ में स्थानांतरित कर देते हैं। इसलिए जागरूक रहें, ‘पेंशन निदेशालय’ कभी भी किसी पेंशन धारक को उनका ‘जीवन प्रमाण पत्र’ ऑनलाइन अपडेट करने के लिए कॉल नहीं करता है और न ही ऑनलाइन जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करता है। यह पेंशन धारकों का कर्तव्य है कि वे अपने जीवन प्रमाण पत्र को व्यक्तिगत रूप से पेंशन निदेशालय में जाकर अपडेट करायें । इस तरह आने वाली फर्जी कॉल्स से बचें व साइबर क्राइम सेल हजरतगंज लखनऊ को सूचित करें। कृपया यह जानकारी पेंशन धारकों को जागरूक करने के लिए साझा करें।

ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के होमपेज  https://www.cybercrime.gov.in/ पर जाएं।

गृह मंत्रालय ने “नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली” मॉड्यूल पर वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्ट करने और “राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल” ( http://www.cybercrime.gov.in ) पर साइबर अपराध की घटनाओं को दर्ज करने में सहायता प्राप्त करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ (पहले ‘155260’)

मथुरा में सामने आए पेंशनर्स के साथ धोखाधड़ी के मामले

दरअसल मथुरा प्रशासन को जानकारी मिली कि कुछ शातिर लोग पेंशनर्स को फोन करके उनका महत्वपूर्ण डेटा लेकर उनके खाते से पैसा निकाल रहे हैं। इसके लिए उनके द्वारा ट्रेजरी ऑफिस के नाम का सहारा लिया जा रहा है। अपराधी खुद को ट्रेजरी से जुड़ा बताते हैं, इसलिए लोग उनकी बातों में भी आ जाते हैं। मथुरा में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पेंशनर्स को फोन करके उनसे खाते आदि की जानकारी मांगी गई और फिर खातों से पैसा निकाल लिया गया। ऐसे दो मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

खाते की कोई भी जानकारी ना करें शेयर’

मथुरा के वरिष्ठ कोषाधिकारी संतोष कुमार कुशवाहा ने बताया कि पेंशन पाने वाले लोगों के साथ साइबर अपराधियों की ओर से धोखाधड़ी के मामलों की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद पेंशनर्स के खातों में पर्याप्त पैसा जमा होता है, इसलिए उनके बारे में जानकारी एकत्र करके उन्हें ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी करने वाले मथुरा कोषागार के नाम से पेंशनर्स को एरियर और अन्य भुगतान करने का लालच देकर उनसे बैंक खाते का विवरण, आधार संख्या के साथ ओटीपी पूछकर बैंक खाते से पैसा निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुछ अन्य जिलों से भी ऐसे मामले सामने आए हैं। वरिष्ठ कोषाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार के साइबर क्राइम की जांच तो पुलिस की साइबर सेल करेगी, लेकिन हम सभी पेंशनर्स से यह अपील रहे हैं कि वो इस प्रकार के किसी फोन कॉल के झांसे में ना आएं और बैंक खातों से जुड़ी कोई भी जानकारी ना दें। उन्होंने यह भी कहा कि ना तो ऐसा कोई फोन किया जाता है और ना ही इस प्रकार की कोई जानकारी मांगी जाती है।

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