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पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, साध्य योग, अमृत सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र का सुंदर संयोग

गुरु पुष्य योग में खरीदारी का विशेष महत्व

24 अक्टूबर गुरुवार को 5 शुभ संयोग में है अहोई अष्टमी व्रत

बिजनौर। इस वर्ष अहोई अष्टमी 24 अक्टूबर गुरुवार को है।अहोई अष्टमी व्रत इस बार 5 शुभ संयोग में है। इस दिन गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, साध्य योग, अमृत सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र का सुंदर संयोग बन रहा है। गुरु पुष्य योग का संबंध देवताओं के गुरु बृहस्पति और शनि से जोड़ा जाता है। बृहस्पति को शुभ कार्य, भाग्य के लिए महत्वपूर्ण समझा जाता है जबकि शनि को स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए गुरु पुष्य योग में खरीदारी का विशेष महत्व है। इस योग में खरीदी हुईं वस्तुएं अक्षय फल देती हैं।

उक्त जानकारी देते हुए सिविल लाइंस स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपनी संतान की कुशलता के लिये उषाकाल, अर्थात भोर से लेकर गोधूलि बेला, सायंकाल तक उपवास करती हैं। सायंकाल के समय आकाश में तारों का दर्शन करने के पश्चात व्रत सम्पूर्ण किया जाता है। कुछ महिलाएं चन्द्रमा के दर्शन करने के पश्चात व्रत पूर्ण करती हैं, किन्तु इसका अनुसरण करना कठिन होता है, क्योंकि अहोई अष्टमी की रात्रि में चन्द्रोदय विलम्ब से होता है। अहोई अष्टमी व्रत का दिन करवा चौथ के चार दिन पश्चात तथा दीवाली पूजा से आठ दिन पूर्व पड़ता है। अहोई अष्टमी का दिन अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि को किया जाता है। आकाश में तारों का दर्शन करने के पश्चात ही उपवास का पारण किया जाता है।

अहोई अष्टमी शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम को 05 बजकर 42 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक है। इस दौरान महिलाएं अहोई माता और भगवान गणेश की उपासना कर सकती हैं।

माताएं क्यों देती हैं अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने के पीछे उद्देश्य ये है कि जिस तरह आकाश में तारे हमेशा चमकते रहते हैं, वैसे ही हमारे परिवार के सभी बच्चों का भविष्य भी चमकता रहे, आयु लंबी हो। माताएं अहोई माता से यही प्रार्थना कर तारों को अर्घ्य देती हैं।

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