कोतवाली देहात में सलीम ने सास को उतारा था मौत के घाट
गंज के महेंद्र ने मां को सुला दिया मौत की नींद
दामाद और बेटे को अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
घोर कलियुग, कठोर फैसला
बिजनौर। कलियुग के इस दौर में रिश्ते नातों का तानाबाना तार तार हो चुका है। कहीं जमीन जायदाद के लिए रिश्तों का खून बहा दिया जाता है तो कहीं मामूली सी बात पर भी अपने ही हत्या तक घिनौनी वारदात कर बैठते हैं। ऐसे ही दो अलग अलग मामलों में अदालत ने एक दामाद और एक बेटे को कड़ी सजा सुनाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते सास की गोली मार कर हत्या करने के आरोप में दामाद समेत दो को फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक के अपर जिला जज खुशतर दानिश ने उम्रकैद की सजा का सुनाई है और दोनों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। एडीजीसी मुकुल कुमार ने बताया कि कोतवाली देहात के मोहल्ला शेखनान निवासी गुलनाज पुत्री अब्दुल रशीद ने मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसकी शादी धामपुर थाना क्षेत्र के गांव बगदाद अंसार निवासी सलीम पुत्र शकील से आठ साल पहले हुई थी। सलीम एक अपराधी प्रवृत्ति का था, इसके कारण दोनों में आएदिन विवाद होता था। इसके चलते सलीम और उसका तलाक हो गया। 24 जुलाई 2019 को वादी गुलनाज, उसकी बहन जोया और माता नूरजहां घर पर थे, तभी रात में सलीम अपने एक साथी इमरान के साथ घर आया। दोनों आरोपियों ने गाली गलौज करते हुए तमंचे से उसकी मां नूरजहां को गोली मार दी। इलाज के लिए मेरठ से दिल्ली ले जाते समय नूरजहां की मौत हो गई थी।
■ दोषी का अपनी पत्नी से चल रहा था विवाद, हो चुका था तलाक ■ अपने साथी के साथ मिलकर आरोपी दामाद ने की थी सास की हत्या
कोर्ट में पेश किए गए कुल नौ गवाह
पूछताछ में सलीम ने पुलिस को अपने साथी इमरान उर्फ छोटू पुत्र रियासत निवासी भीखनपुर छजलैट जिला मुरादाबाद का नाम भी बताया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया था। विचारण के दौरान अभियोजन ने मामले के समर्थन में अदालत में नौ गवाहों को पेश किया। गुरुवार को कोर्ट ने दोनों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा का फैसला सुनाया है और चार लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मां की हत्या के दोषी पुत्र को 10 साल कठोर कारावास
दूसरी तरफ पॉक्सो कोर्ट के अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश प्रकाश चंद्र शुक्ला ने मां की हत्या में दोषी में दोषी पुत्र को दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। बेटे ने हत्या के बाद मां के शव को बाग में छिपा दिया था। एडीजीसी मुकेश चौहान ने बताया कि कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के दारानगर गंज निवासी ऋषिपाल सिंह पुत्र चतरू सिंह हाल निवासी देहरादून ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि वह अपने दो भाइयों के साथ देहरादून में रहता है, जबकि उसका छोटा भाई महेंद्र व मां यशोदा गांव में ही रहते हैं। छोटा भाई महेंद्र शराब पीकर अकसर मां के साथ झगड़ा करता था। मां यशोदा 22 अगस्त 2017 को घर से अचानक लापता हो गई थी। पुलिस ने तीन दिन बाद उनका शव एक बाग से बरामद किया। पुलिस ने शव को लावारिस समझकर अंतिम संस्कार कर दिया। वादी ने यह भी आरोप लगाया था कि लापता से होने से एक दिन पहले मां यशोदा ने फोन पर बताया कि उसका छोटा भाई महेंद्र शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता है। वादी ऋषिपाल ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था और कपड़ों से यशोदा की पहचान की थी।
■ संपत्ति विवाद में मारपीट के दौरान हुई थी मौत
पुलिस की जांच में सामने आया कि महेंद्र ने संपत्ति विवाद में डंडा मारकर यशोदा की हत्या करने के बाद शव को बाग में छिपा दिया था। अभियोजन की ओर से इस मामले में छह गवाह पेश किए गए। गुरुवार को अदालत ने मृतका के छोटे पुत्र महेंद्र को 10 साल कठोर कारावास सजा सुनाई और 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया।

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