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डीएम के माध्यम से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भेजा ज्ञापन

हाईकोर्ट के जजों के आचरण को लेकर कांग्रेस में उबाल

बिजनौर। विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश शेखर कुमार यादव व न्यायाधीश दिनेश पाठक के भाग लेने, उद्घाटन करने व कथित तौर पर अमर्यादित टिप्पणी करने के विरोध में अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमेटी ने डीएम को ज्ञापन सौंपा। उक्त ज्ञापन सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है।

कलक्ट्रेट में अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव, बिहार के प्रभारी व कॉंग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश चेयरमैन जनाब शाहनवाज़ आलम साहब के निर्देशानुसार और वसीम अकरम (एङ) ज़िलाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग बिजनौर के नेतृत्व में जिलाधिकारी को मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय को विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश शेखर कुमार यादव व न्यायाधीश दिनेश पाठक के भाग लेने, उद्घाटन करने व कथित तौर पर अमर्यादित टिप्पणी करने के विरोध में ज्ञापन दिया।

बताया गया कि द वायर, द लॉ, हिंदुस्तान टाइम्स व द फ़ेडरल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार रविवार 08 दिसंबर 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया व न्यायाधीश दिनेश पाठक ने उद्घाटन किया। जस्टिस शेखर कुमार यादव और जस्टिस दिनेश पाठक किसी गैर सरकारी और गैर विभागीय मंच पर कैसे जा सकते हैं। यह जजों के कोड ऑफ़ कंडक्ट के खिलाफ़ है।

कांग्रेस नेताओं का कहना रहा कि यू०सी०सी (यूनिफार्म सिविल कोड) भाजपा का चुनावी एजेंडा है, जिस पर अधिकतर राजनैतिक दलों में मतभेद है। कानून बनाना विधायिका का काम है, न्यायपालिका का नहीं। न्यायपालिका का काम केवल विधायिका द्वारा बनाए गए कानून की व्याख्या करना और उसके क्रियान्वयन को निर्देशित करना है, परन्तु यू०सी०सी० लागू करने के पक्ष में जस्टिस यादव का बयान भाजपा के एजेंडे को किर्यान्वित करना है।

जस्टिस शेखर कुमार यादव का कहना कि मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि यह भारत है और यह अपने बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार चलेगा; ये बताता है कि जस्टिस यादव संविधान तक को नहीं मानते, जो भारत को बहुसंख्यकवादी राज्य नहीं बल्कि सेकुलर और लोकतांत्रिक राज्य मानता है। इसके अनुसार देश को संविधान के हिसाब से चलना है। जस्टिस शेखर यादव संविधान को नहीं मानते तो वो संविधान की अभिरक्षा के लिए बने न्यायपालिका के सदस्य कैसे रह सकते हैं? जस्टिस यादव का विवादित बयानों से पुराना नाता है, जिन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु बनाए जाने संबंधी बयान देते हुए कहा था कि गाय एकमात्र ऐसी जानवर है, जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है। ऐसी अवैज्ञानिक बात करना संविधान के आर्टिकल 51-ए (एच) के खिलाफ़ है, जो वैज्ञानिक चिंतन के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी हर नागरिक को देता है।

ज्ञापन के माध्यम से संविधान में आस्था रखने वाले हम लोग आप से पूछते एवं मांग करते हैं कि –
● क्या सेक्युलर राज्य के न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का राजनैतिक पार्टियों के कार्यक्रम में हिस्सा लेना संवैधानिक आचरण के अनुरूप है?
● क्या इन दोनों जजों के पूर्व के फैसलों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट को नहीं करनी चाहिए?
● अमर्यादित भाषा व अलोकतांत्रिक व्यवहार को ख़ुद संज्ञान लेकर, सुप्रीम कोर्ट को इन दोनों जजों को पद से हटा देना मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी है!
● विधायिका और कार्यपालिका से कहीं ज़्यादा लोग अब भी न्यायपालिका पर विश्वास करते हैं। इस विश्वास को कायम रखना और मजबूत करना आपकी ज़िम्मेदारी है। इसमें आपकी विफलता संवैधानिक मूल्यों को कमज़ोर करेगी।

इस दौरान साथ में अल्पसंख्यक प्रदेश उपाध्यक्ष हुमांयू बेग, कांग्रेस वरिष्ठ नेता वकार, कांग्रेस वरिष्ठ नेता मौ. मोहसिन, डॉक्टर जुनैद अली, डॉक्टर अजीम अहमद, मौ. आदिल, मौ. हिफजांन, नसीम अहमद, नवाजिश अंसारी, गुलाम हैदर, नौशाद मलिक, अजीम अहमद, वसीम अहमद, मौ. रिजवान, फिरोज अहमद  एवं कॉंग्रेस अल्पसंख्यक कार्यकर्ता आदि मौजूद रहे।

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