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पाना नहीं, जो देना चाहते हों, आगे आएं वो नौजवान

सेवक बनने के बजाय भेड़िए बन चुके हैं जनप्रतिनिधिः चौधरी दिगंबर सिंह

पाना नहीं, जो देना चाहते हों, वो नौजवान आगे आएं और हमारे साथ जुड़ें, जो देना चाहते हों अपना समय और अपना समर्पण, किसानों की उन्नति के लिए। जो कठिन तपस्या करने के लिए तैयार हों। जिन्हें अपने परिवार से किसान भारत माता और प्रकृति प्यारी हो, जिन्हें जेल जाने से डर ना लगता हो, वह नौजवान जिनका चरित्र मजबूत हो, वह नौजवान आगे आएं पाने के लिए नहीं, देने के लिए। आज जब मैं देखता हूं कि इस देश को आजाद करने के लिए न जाने कितने जाने और अनजाने लोग फांसी के फंदे पर झूल गए, इस देश के अंदर लोकतंत्र स्थापित हुआ लेकिन उसे लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुने गए तमाम जनप्रतिनिधि जनता का सेवक बनने के बजाय भेड़िए बन चुके हैं। जनता को लूटने के लिए अपना ग्लैमर दिखाने के लिए साथ चलते हैं, जनता की सेवा करने के बजाय जनता पर रौब ग़ालिब करने का काम करते हैं। ठीक उसी प्रकार किसान संगठन में जुड़ने वाले लोग जिस तरह से किसान संगठनों को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। कभी-कभी जब सुनने को मिलता है किसान नेताजी मिट्टी के खनन के नाम पर लोगों से पैसे मांग रहे हैं, उनकी ऑडियो वायरल हो रही हैं, कभी डॉक्टर से पैसे मांगने की ऑडियो वायरल होती है, कभी नेताजी शराब पीने के लिए पैसे मांगते नजर आते हैं। हदें तो जब पार हो जाती हैं, जब किसान नेता स्कूल कॉलेज पर भी दबाव बनाकर पैसे मांगते हैं और तब नीचता की पराकाष्ठा पार हो जाती है, जब किसान नेता किसान आंदोलन को बेच देते हैं। जो भीड़ किसान समस्याओं के समाधान के लिए आती है, जब भीड़ को बेच दिया जाता है और जब इस तरह की सूचनाएं प्राप्त होती हैं, ऑडियो सामने आती हैं तो मन विचलित होता है और मन सोचता है कि महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा आसमान में बैठकर क्या सोचती होगी। शायद यह सोचती होगी कि मैंने क्यों किसान संगठन बनाया। महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा और उन तमाम किसान शहीदों की आत्मा उस समय रोती होगी जब किसान यूनियन के नाम पर किसान नेतागिरी के नाम पर गरीब और मजदूरों का शोषण होता होगा और अपराधियों को छुड़ाने के लिए थानो पर धरना होता होगा। रोती होगी महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा, तमाम उन किसान शहीदों की आत्मा उस समय जब महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत अमर रहे का नारा लगाने वाले लोग किसानों को कृषि कार्ड के नाम पर ठग लेते होंगे और पूरा का पूरा संगठन उन ठगों के साथ खड़ा होकर उनको बचाने के लिए धरना प्रदर्शन करता होगा। जब उस किसान के घर में बैंक की रिकवरी जाती होगी, जब वह किसान रोता होगा, तब तब महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा रोती होगी। इसलिए साथियों आज आवश्यकता है ऐसे नौजवानों की जो महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत की विचारधारा को बचा सकते हो, जो पाना नहीं देना चाहते हैं समाज को, किसान को, इस देश को….

~विचलित मन से महात्मा महेंद्र सिंह टिकैत का शिष्य दिगंबर सिंह

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