दूसरे बड़े मंगल पर लखनऊ में भंडारा
सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि लखनऊ की आत्मा है बड़ा मंगल
The Ho Halla की ग्राउंड रिपोर्ट~ https://thh.newzo.in/Lnk/SRWR202505201901564781961341
https://youtu.be/aSoDJn_UpCI?si=PBXukJrSvgbUeT3F

लखनऊ। मई-जून के महीने में लखनऊ की सड़कों पर जगह-जगह पूरी-सब्जी, कढ़ी चावल, छोले चावल, फल बांटते, शरबत पिलाते लोगों की भीड़ दिखेगी। ये नज़ारा किसी त्योहार का नहीं, बल्कि लखनऊ में एक खास दिन होता है, जिसे कहते हैं बड़ा मंगल। हर साल ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को यह परंपरा निभाई जाती है। कुल मिलाकर सिर्फ पूजा नहीं, भाईचारे की पहचान है बड़ा मंगल।
यह दिखाता है कि यहां के लोग धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे की सेवा करते हैं।

एक चमत्कारी घटना से जुड़ी हुई है बड़े मंगल की शुरुआत
बड़े मंगल की शुरुआत एक चमत्कारी घटना से जुड़ी हुई बताई जाती है। सैकड़ों साल पहले, लखनऊ में दक्षिण भारत की एक महिला अपने साथ हनुमान जी की एक छोटी-सी मूर्ति लेकर आई थी। उस समय लखनऊ में नवाबों का शासन था। महिला ने लखनऊ में ही हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करने की इच्छा से नवाब वाजिद अली शाह से बात की। नवाब ने उसे मंदिर बनाने की अनुमति दे दी।


मूर्ति स्थापित होते ही शुरू हुए चमत्कार
कहा जाता है कि उस मूर्ति में चमत्कारी शक्ति थी। जैसे ही हनुमान जी की मूर्ति को स्थापित किया गया, आसपास के लोग कहने लगे कि उनके जीवन में अचानक खुशियां आने लगीं, बीमारियां दूर होने लगीं, और घर में सुख-शांति बढ़ने लगी। इन बातों ने लोगों का विश्वास और बढ़ा दिया। लोगों ने हनुमान जी को धन्यवाद देने के लिए मंगलवार को भंडारा करना शुरू किया। अब हर साल ज्येष्ठ महीने में चार या पांच मंगलवारों को पूरे लखनऊ में हजारों भंडारे लगते हैं।
सिर्फ भक्ति नहीं, मानवता की सेवा

बड़े मंगल पर लखनऊ के हर मोहल्ले, हर सड़क, हर गली में भंडारे लगते हैं। पूरी-सब्जी, छोले-चावल, मिठाई, शरबत, ठंडा पानी और कई जगहों पर फल और आयुर्वेदिक काढ़े तक बांटे जाते हैं। आम लोग ही नहीं, बड़े कारोबारी, राजनेता, स्कूल-कॉलेज, और यहां तक कि मुस्लिम समाज के लोग भी इसमें हिस्सा लेते हैं और खुद खड़े होकर सेवा करते हैं। इसे सिर्फ भक्ति नहीं, मानवता की सेवा भी माना जाता है।
नागेश्वर महादेव मंदिर में सुंदर कांड का पाठ
आशियाना कालोनी स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा पूर्ण भक्ति भाव से सुंदर कांड का पाठ किया गया। बाद में प्रसाद वितरण किया गया। पंडित देवी प्रसाद जी ने बताया कि यहां प्रत्येक शनिवार को सुंदरकांड का आयोजन किया जाता है।



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