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साथ में अन्य उत्पादों की टैगिंग पर भी रहेगी सख्त नजर

उर्वरक नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधान के तहत होगी कार्रवाई

सख्ती से रोकेंगे उर्वरक बिक्री में ओवर रेटिंग, कालाबाजारी

बिजनौर। कृषकों को उनकी जोत/कृषि भूमि के आधार पर ही नियमित रूप से फसल की संस्तुतियों के अनुरूप उर्वरकों का वितरण एवं बिक्री के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग रोकने, ओवर रेटिंग, कालाबाजारी की सतत निगरानी सुनिश्चित किये जाने हेतु शासन ने निर्देश जारी किए हैं।

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में खरीफ फसलों की बुवाई/रोपाई का कार्य मुख्यतः माह जून से कृषकों द्वारा प्रारम्भ कर दिया गया है। बुवाई के समय फसल बेसल-ड्रेसिंग में मुख्यतया फास्फेटिक उर्वरकों यथा डी.ए.पी., एन.पी.के., एस.एस.पी. एवं एम.ओ.पी. उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में गन्ने की फसल की टाप-डेंकिग का कार्य भी किया जा रहा है, जिस हेतु यूरिया उर्वरकों की मांग अधिक है। जनपद के प्रत्येक कृषकों को जोत एवं उगायी जाने वाली फसल की निर्धारित संस्तुतियों के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराए जाने के निर्देश हैं।

1. यूरिया, डी.ए.पी.,एन.पी.के. काम्प्लेक्स एवं एम.ओ.पी. की निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य दर के अन्तर्गत बिक्री सुनिश्चित कराई जाए। यदि कोई उर्वरक विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बिक्री करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधान के अनुसार प्रभावी विधिसंगत कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जायेगी।
2. कृषकों को उर्वरक की बिक्री करते समय उनकी जोत-बही/खतौनी देखकर उसमें अंकित कृषि भूमि एवं उगाई जाने वाली फसल एवं उनके आधार कार्ड के अनुसार ही निर्धारित संस्तुतियों के अनुसार (संलग्नक-1) पी.ओ.एस. मशीन के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित की जाए।
5. उर्वरक विक्रेताओं द्वारा अपने विक्रय केन्द्रों पर उर्वरक बिक्री करते समय उर्वरकों का वितरण विक्रय रजिस्टर पर अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए, जिसमें क्रेता कृषक का नाम, पिता का नाम, ग्राम, विकासखण्ड, तहसील, मोबाइल नम्बर के साथ-साथ जोत-बही/खतौनी एवं बोई जाने वाली फसल का विवरण भी अनिवार्य रूप से पृथक पंजिका में अंकित किया जाए।
3. यदि कोई थोक उर्वरक विक्रेता या फुटकर उर्वरक विक्रेता मुख्य उर्वरकों यथा यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के. काम्प्लेक्स, एम.ओ.पी. एवं एस.एस.पी. के साथ अन्य उत्पादों को भी खरीदने हेतु बाध्य करता है तो सम्बन्धित के विरुद्ध उर्वरक नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधान के अनुसार प्रभावी विधिसंगत कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जायेगी।
4. यदि ऐसे उर्वरक विनिर्माता/प्रदायकर्ता संस्थाओं पर भी किसी थोक उर्वरक विक्रेता को प्रमुख उर्वरक यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के. काम्प्लेक्स, एम.ओ.पी. एवं एस.एस.पी. के साथ अन्य उत्पादों को भी खरीदने हेतु बाध्य करता है तो सम्बन्धित के विरुद्ध उर्वरक नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधान के अनुसार प्रभावी विधिसंगत कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जायेगी।
6. प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के स्तर पर स्टाक पंजिका, विक्रय पंजिका तथा रसीद अनिवार्य रूप से रखी जाए या ऐसे प्रारूप में डिजिटल स्टाक रजिस्टर, जो तिथिवार स्टाक स्थिति, आरम्भिक अतिशेष दिन के दौरान प्राप्तियां, दिन के दौरान विक्रय और अन्तिम स्टाक को स्पष्ट प्रदर्शित करता हो, का होना आवश्यक है तथा उर्वरक बिक्री केंद्रों पर उर्वरकों की उर्वरकवार बिक्री दर तथा स्टाक का अंकन रेट/स्टाक बोर्ड पर प्रतिदिन अंकित किया जाए।
7. उर्वरकों का सुगमतापूर्वक कृषकों की मांग/आवश्यकता के अनुरूप वितरण किए जाने हेतु सहकारिता, गन्ना, अन्य सहकारी संस्थाओं के उर्वरक बिक्री केंद्रों पर उर्वरक की बिक्री की सतत निगरानी हेतु अपने-अपने विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों की केन्द्रवार ड्यूटी लगा कर उनकी देखरेख में उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
8. समस्त उर्वरक विक्रेता यह भी ध्यान में रखे प्रतिमाह यूरिया टॉप-20/फ्रिक्वेन्ट बायर्स सत्यापन किया जाता है। कोई भी उर्वरक विक्रेता कृषकों की भूमि की उपलब्धता एवं फसल के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण करे। यदि कोई उर्वरक टॉप-20 यूरिया बिक्री में संदिग्ध पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियन्त्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के प्राविधान के अनुसार प्रभावी विधिसंगत कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जायेगी।
जिला कृषि अधिकारी ने उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराते हुए उर्वरकों का वितरण कराने तथा उर्वरक वितरण का कृषकवार अभिलेखीकरण अवश्य कराने निर्देशित किया।

बीज खरीदते समय अवश्य प्राप्त करें बीज रसीद/वाउचर्स बिजनौर। वर्तमान में खरीफ में विभिन्न फसलों का समय चल रहा है, ऐसी दशा में बीज विक्रेताओं/डीलरों के द्वारा बीज की होल्डिग करते हुए अधिक मूल्य में बीज विक्रय, डुप्लीकेट बीज एवं कालाबाजारी किए जाने का प्रयास किया जा सकता है। ऐसी किसी भी संभावना को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कृषक भाईयों से अपील की है कि बीज खरीदते समय बीज रसीद/वाउचर्स अवश्य प्राप्त करें, यदि किसी फर्म/ कम्पनी/ डीलर/ बीज विक्रेता द्वारा किसी भी प्रकार की अनियमितता/ कालाबाजारी की जाती है तो उसकी सूचना उनको उपलब्ध कराएं ताकि सम्बन्धित के विरुद्ध बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 एवं बीज नियन्त्रण आदेश 1983 में निहित प्राविधानों के अर्न्तगत कठोर विधिक कार्यवाही की जाए।
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