पाश्चात्य केक वाली संस्कृति से बनानी होंगी पर्याप्त दूरी
बच्चे के विशाल व्यक्तित्व के लिए पुंसवन संस्कार आवश्यक – सुधा राठी
बिजनौर। गायत्री जयंती पर शक्तिपीठ पर गायत्री महायज्ञ का आयोजन कर पुंसवन संस्कार की महत्ता और गंगा दशहरा के महत्व पर बल दिया गया। वरिष्ठ गायत्री साधक सुधा राठी ने बताया कि बच्चों को स्वामी विवेकानंद के समान धीर गंभीर बलिष्ठ और विद्वान बनाने के लिए माता का पुंसवन संस्कार बहुत ही आवश्यक है। महायज्ञ सुधा राठी, बीना राठी और कामायनी शर्मा ने कराया।


सुधा राठी ने यज्ञ से पूर्व गायत्री मंत्र की महत्ता, गायत्री जयंती का आध्यात्मिक महत्व और सनातन संस्कृति के अनुसार जन्मदिन और विवाह दिवस मनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह पर्व, त्योहार और संस्कार ही हमारी पहचान हैं, हमारी जड़ें हैं। हमें पाश्चात्य केक वाली संस्कृति से पर्याप्त दूरी बनानी होंगी। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन महात्मा भागीरथ की तपस्या के कारण गंगा माता पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। महायज्ञ में गंगा माता की वंदना कर वेद मंत्रों से भारतीय सेना को और अधिक शक्तिशाली, सैनिकों का आत्मबल और सशक्त बनाने तथा देश के चहुंमुखी विकास के लिए भी विशेष आहुतियां प्रदान कीं गई।


यज्ञ के यजमान ओम पाल सिंह हृदयेश सिंह महीपाल सिंह संतोष देवी आदि थे। यज्ञ में अमरेश राठी, इंजीनियर रामपाल सिंह, प्रेम प्रताप सिंह, हुकुम सिंह शास्त्री, ज्ञान वीर सिंह, मंजू सिंह, देवराज त्यागी, अशोक कुमार भटनागर, राजवर्धन भटनागर, रामपाल सिंह, अनिल मिश्रा, प्रदीप सैंगर, हिमांशु सोती, प्रेम प्रताप सिंह, अशोक कुमार शर्मा, केदारनाथ साहू, नर्मदा साहू, कमलेश शर्मा, वीरवती, दीप्ति शर्मा, कुशाग्र शर्मा, राजेन्द्र सिंह, नीरा अग्रवाल, डौली, नीरा शर्मा, रुपा चौधरी, प्रणाली सोती, पिंकी शर्मा, प्रदीप भटनागर समेत अनेक श्रद्धालुओं ने आहुतियां प्रदान कीं। यज्ञ के दौरान माताओं के पुंसवन संस्कार भी कराए गए।
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