जंगल के कई हिस्सों में बिखरे मिले शव के टुकड़े
वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर लगवाया पिंजरा
आठ वर्षीय लड़की को उठा ले गया गुलदार
बिजनौर। नहटौर के ग्राम मडोरी में आठ वर्षीय लड़की को गुलदार उठाकर ले गया। सूचना पर वन विभाग की टीम व ग्रामीणों ने बच्ची की तलाश की। सारी रात तलाश करने के बाद अगले दिन प्रातः करीब 8 बजे बच्ची के शरीर के अलग-अलग अंश जंगल के कई हिस्सों में बिखरे मिले। बच्ची के शरीर के अंगों को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पिंजरा लगवाया। घटना से गांव में गम व दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार क्षेत्र के गांव मंडोरी में बताया जाता है कि कनिका पुत्री रवि कुमार 10 वर्ष बुधवार को शाम 5 बजे घर के बाहर खेलने गई थी। दिन छिपने के बाद भी जब वह घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने उसकी तलाश की। बच्ची के लापता होने की सूचना पर अनेक ग्रामीण व पुलिस भी मौके पर पहुंच गए और तलाश में जुट गए। काफी तलाश के बाद पास के जंगल में खून दिखाई देने पर बच्ची को दिलदार के उठा ले जाने की बात सामने आई।

बच्ची को गुलदार के उठा ले जाने की सूचना पर तुरंत वन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और तलाश में जुट गए। वन विभाग अधिकारियों व पुलिस ने ड्रोन आदि से जंगल की कांबिंग करते हुए तलाश की लेकिन सारी रात बच्ची का कहीं पता नहीं चला। गुरुवार की प्रातः 8 बजे जंगल में अलग-अलग स्थान पर बच्ची के शरीर के कई अंग मिले। बच्ची के शरीर के अलग-अलग अंग मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया और गांव में दहशत व्याप्त हो गई।

बच्ची की मौत के बाद हरकत में आये वन विभाग की टीम रेंजर हरदेव सिंह के नेतृत्व में पिंजरा लेकर मौके पर पहुंची तथा ग्रामीणों की मदद से घटना स्थल पर पिंजरा लगाया। वन विभाग की टीम में वन दारोगा लखमीचंद, तेजपाल सिंह, नरेश कुमार आदि शामिल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि वे वन विभाग से लंबे समय से पिंजरा लगवाकर गुलदार को पकड़ने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका मानना है कि यदि वन विभाग उनकी मांग को गंभीरता से लेता, तो शायद घटना टल सकती थी।
एक वर्ष पूर्व भी बच्ची को बनाया था निवाला
नहटौर। बताया गया है कि करीब एक वर्ष पूर्व भी इसी गांव में मुकेश कुमार की 10 वर्षीय पुत्री कनिष्का को भी जंगल में गुलदार ने मार डाला था। बाद में वन विभाग की टीम ने गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाया था। करीब एक माह तक गांव में पिंजरा लगा रहने के बावजूद गुलदार पकड़ में नहीं आया था। उसके बाद वन विभाग की टीम पिंजरे को ले गई थी। तभी से आज तक गांव में दहशत का माहौल व्याप्त है। समय-समय पर ग्रामीण वन विभाग से गुलदार को पकड़े जाने की मांग कर रहे थे।
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