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15 साल की नाबालिग समेत दबोचे पांच शातिर

मड़ियांव थाना पुलिस को मिली सफलता

टाइल्स का काम, कार मैकेनिक, चिकन कारीगर और चाय की दुकान चलाने वालों का गिरोह

खुलासा: पुलिस के हत्थे चढ़ा टाइल्स कारीगर का चोर गैंग

~पीयूष द्विवेदी

लखनऊ। पुलिस ने बंद घरों में चोरी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मड़ियांव थाना पुलिस ने इस गैंग के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक पंद्रह साल की नाबालिग भी शामिल है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में  सोने-चांदी के जेवर और चार हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं।

लखनऊ कमिश्नरेट के मड़ियांव थाना प्रभारी निरीक्षक शिवानंद मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस ने गुरुवार को बंद घरों में चोरी करने वाले गैंग के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी गैंग में एक पंद्रह साल की नाबालिग भी शामिल थी। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर, चार हजार रुपए नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस सभी के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने में लगी है। खास बात यह है कि सभी आरोपी अलग-अलग काम से जुड़े थे, पर अपराध से होने वाली आमदनी ने इन्हें नकबजनी की ओर खींचा।

उत्तरी जोन एडीसीपी जितेन्द्र दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, लगातार हो रही चोरी की घटना को लेकर पुलिस मड़ियांव थाना क्षेत्र अंतर्गत नौबस्ता मोड के पास चेकिंग कर रही थी, तभी मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ युवक चोरी के सामान के साथ राधा डिग्री कॉलेज के पास बैठे हैं। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर पांचों को पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास जेवर और नगदी मिली। पूछताछ में आरोपी पुलिस को गुमराह करने लगे। कड़ाई से पूछताछ करने पर चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिस टीम ने बताया कि मौके से करीब 15 वर्षीय एक नाबालिग को भी संरक्षण में लिया गया है।

पहचान:
1. असगर (21 वर्ष): मुजफ्फरपुर, बिहार का रहने वाला है और लखनऊ के अलीनगर में टाइल्स का काम करता है।
2. अदनान (20 वर्ष): मड़ियांव का निवासी है और पेशे से कार मैकेनिक है।
3. गुलाम अहमद रजा उर्फ अफरीदी (23 वर्ष): चिकन कारीगरी का काम करता है।
4. रिजवान अहमद (30 वर्ष): एक चाय की दुकान चलाता है।

चोरी और काम करने का तरीका

काम करने का तरीका: पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बंद घरों के ताले तोड़कर चोरी करते थे।
चोरी का सामान: वे घरों से सोने-चांदी के गहने और नकदी चुराते थे।
आगे का काम: चोरी के सामान को बाद में बाजार में बेचकर आपस में पैसे बांट लेते थे।
गैंग का गठन: सभी आरोपी अपने-अपने काम के दौरान एक-दूसरे से मिले और फिर एक गिरोह बनाकर कई चोरियों को अंजाम दिया।
आगे की जांच: पुलिस अब आरोपियों के पिछले आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है।

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