ऊपर से नीचे तक सभी सुनियोजित भ्रष्टाचार में लिप्त !
“आखिर कौन है इसका ‘सुपर चीफ” ?
LDA में अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों का सिंडिकेट !
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माण का खेल एक बड़ा और संगठित सिंडिकेट चला रहा है, जिसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के विभिन्न अधिकारी शामिल हैं? यह कोई साधारण मिलीभगत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है, जिसमें प्रवर्तन अधिकारी, अवर अभियंता, सहायक अभियंता, जोनल अधिकारी और यहां तक कि विहित प्राधिकारी भी लिप्त हैं! ‘अवध की आवाज़’ समाचार पत्र की एक विस्तृत जांच में यह सामने आया है कि ये अधिकारी लोकहित और जनहित की परवाह किए बिना अपनी दूषित कार्यशैली से करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर रहे हैं।

नोटिस से लेकर सीलिंग तक, हर कदम पर ‘डीलिंग’
खबर के अनुसार, LDA के प्रवर्तन अधिकारी अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ मिलकर काम करते हैं। वे न केवल नोटिस जारी करने में ढिलाई बरतते हैं, बल्कि सीलिंग के मामलों में भी ‘डीलिंग’ करते हैं। इनकी भ्रामक कार्यशैली का नतीजा यह है कि अवैध निर्माण पूर्ण हो जाते हैं और उनमें लोग रहने भी लगते हैं। विभाग को मिलने वाला करोड़ों का राजस्व सुविधा शुल्क की भेंट चढ़ जाता है।
जब समाचार पत्रों में इन अवैध निर्माणों की खबरें छपती हैं या शिकायतकर्ता शिकायत करते हैं, तो कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। यह सबसे बड़ा विरोधाभास है कि ये सभी मामले LDA के मुखिया, यानी उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और अन्य उच्चाधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती! सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों इस ‘संयुक्त खेल’ में शामिल अधिकारियों, के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जाती?

प्रवर्तन ज़ोन-3 का एक चौंकाने वाला मामला
इस सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए, ‘अवध की आवाज़’ ने एक-एक मामले को उजागर करने का संकल्प लिया है। इसी कड़ी में, प्रवर्तन ज़ोन-3 का एक मामला सामने आया है। यहाँ सभी नियमों और मानकों को ताक पर रखकर लगभग 400 अवैध रो हाउस का निर्माण किया गया। इन रो हाउस से जुड़ी शिकायतें भी थीं, लेकिन सिंडिकेट ने उन्हें संरक्षण दिया और निर्माण को पूरा करवाकर उनमें लोगों को रहने भी दिया।
झूठी और भ्रामक रिपोर्ट देकर शिकायत का निपटारा
तत्कालीन अवर अभियंता संजय शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने झूठी और भ्रामक रिपोर्ट देकर शिकायत का निपटारा कर दिया! उन्होंने मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और राजीव कुमार जैसे उच्च अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों का भी उल्लंघन किया। यह स्पष्ट रूप से एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था, जिसमें तत्कालीन सभी प्रवर्तन अधिकारियों ने जनता के साथ धोखाधड़ी की। भविष्य में इन अवैध निर्माणों के कारण जनता को आर्थिक, मानसिक या जान-माल की हानि हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेगा।
अधिकारियों की चुप्पी: कौन है इस सिंडिकेट का ‘सुपर चीफ’?

खबर में इस बात पर जोर दिया गया है कि तत्कालीन और वर्तमान दोनों ही उपाध्यक्षों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है! …न तो दोषियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही की गई है और न ही ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं? यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इस सिंडिकेट को आखिर कौन संचालित कर रहा है? कौन है वह ‘सुपर चीफ’, जिसके इशारे पर सारे मामले बंद फाइलों में दब जाते हैं?
इस खबर ने लखनऊ के अवैध निर्माणों और अधिकारियों की मिलीभगत की एक परत खोली है। ‘अवध की आवाज़’ ने घोषणा की है कि अगले समाचार में उन अधिकारियों के नाम और खुलासे किए जाएंगे, जो इन 400 अवैध रो हाउस से जुड़े हैं। जारी रहेगी यह खबर ..…
लविप्रा में अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले अवर अभियंताओं, सहायक अभियंताओं, जोनल अधिकारियों व विहित प्राधिकारियों का सक्रिय मजबूत सिण्डिकेट
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