फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर मुजफ्फरनगर में हुई महत्वपूर्ण बैठक
फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कराएंगे कड़ी कार्रवाई
अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है अनुसूचित जाति समाज
लखनऊ। अनुसूचित जाति समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। यह संदेश पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में संपन्न हुई बैठक में निकल कर आया है।
दरअसल शाहवली/वार्ड नंबर-2 मुजफ्फरनगर में, 31 अगस्त, 2025 को नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के सभासद पति सुंदर सिंह के आवास सह कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन हुआ।
इस बैठक में अनुसूचित जाति समाज के जागरूक और बुद्धिजीवी लोग शामिल थे, जिन्हें विश्व दलित परिषद/ वर्ल्ड दलित काउंसिल के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष, भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब और विश्व दलित काउंसिल यूथ सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह ने संबोधित किया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य फर्जी और कूटरचित अनुसूचित जाति प्रमाण पत्रों के मुद्दे पर चर्चा करना था। वक्ताओं ने समाज के लोगों को इन प्रमाण पत्रों को रद्द कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के तरीकों के बारे में समझाया।


बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
बैठक में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के तीन मुख्य मामलों पर चर्चा की गई:
1. 485 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र हिंदू जुलाहा समाज के भुईयार और कोरी के नाम पर बनाए गए हैं।
2. 1408 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की गडरिया/पाल/बघेल जातियों के लोगों को “धनगर” के नाम से जारी किए गए हैं।
3. 3 फर्जी प्रमाण पत्र: ये प्रमाण पत्र मुस्लिम महिलाओं को जारी किए गए हैं।
कार्रवाई की मांग और आगे की योजना
कुल मिलाकर, लगभग 1493 फर्जी प्रमाण पत्रों के धारकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। बैठक में शामिल वक्ताओं और समाज के लोगों ने जिला स्तरीय कास्ट स्क्रूटनी कमेटी, मुजफ्फरनगर से इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को तुरंत निरस्त कराने की मांग की। यह कमेटी जिलाधिकारी महोदय, मुजफ्फरनगर की अध्यक्षता में गठित है। इसके साथ ही, उन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने और जारी करने में शामिल सभी व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।
इनमें शामिल हैं:
1. सर्टिफिकेट जारी करने वाले तत्कालीन तहसीलदार,
2. लेखपाल, कानूनगो, नाज़िर और क्लर्क (नाम और पता अज्ञात)।
3. लोकवाणी केंद्रों के संचालक (नाम और पता अज्ञात)।
4. फर्जी तस्दीक करने वाले और झूठे तथ्य व साक्ष्य देने वाले अन्य सभी दोषी कर्मचारी और अधिकारी।
5. झूठे हलफनामे (affidavits) देने वाले व्यक्ति।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इन सभी दोषियों के खिलाफ समुचित आपराधिक कार्रवाई (क्रिमिनल प्रोसीडिंग)/एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
भूपेंद्र पाल सिंह चमार साहब ने समाज के लोगों को इस लड़ाई में एकजुट रहने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए प्रेरित किया। हर्षवर्धन सिंह ने युवाओं से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया ताकि समाज के वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार मिल सके। यह बैठक इस बात पर जोर देती है कि अनुसूचित जाति समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
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